सर्दियों में प्राय: फेफड़ों में कफ जमने की समस्या बढ़ जाती है और लंबे समय तक बनी रहती है। यहां तक कि जिन लोगों को निमोनिया, ब्रोंकाइटिस और अस्थमा की दिक्कत रहती है उनमें भी ये समस्या देखी जाती है। दरअसल, कफ और कंजेशन की वजह से लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है और कई बार सोने में भी समस्या होने लगती है। ऐसे में हर बार एंटीबायोटिक दवाओं को लेना सेहत के लिए उतना फायदेमंद नहीं माना जाता है जितना कि देसी उपचार। विशेषज्ञ बतलाते हैं कि फेफड़ों में कफ जमने पर काली मिर्च का काढ़ा फायदेमंद हो सकता है।
बलगम को पतला करने में सहायक
काली मिर्च में मौजूद पिपेरिन तत्त्व बलगम को पतला करने में मदद करता है, जिससे कफ आसानी से बाहर निकल जाता है और सांस लेने में राहत मिलती है। एल्कलॉइड प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले रासायनिक यौगिकों का एक समूह है जो कि कफ को तोड़ने के साथ कई पुरानी बीमारियों के ख़िलाफ़ कारगर है, जिसमें कि पहले तो ये इंसुलिन प्रतिरोध में कमी लाता है, सूजन कम करता है और फैटी लिवर में जमाव।
छाती में जकड़न को करे कम
फेफड़ों में कफ जमने पर काली मिर्च का काढ़ा काफी लाभपदाक है। विशेषज्ञ बतलाते हैं कि यह काढ़ा छाती में जकड़न, भारीपन और खांसी की परेशानी को कम करने में सहायक माना जाता है। कंजेशन होने पर काली मिर्च का काढ़ा कफ तोड़ता है और इसे ढीला करता है। इसके अलावा ये फेफड़ों में गर्मी पैदा करता है, जिससे कफ को बाहर निकालने में मदद मिलती है। इससे छाती में जमा कफ की सफाई हो जाती है और पीड़ित व्यक्ति जकड़न से राहत महसूस करता है।
काढ़ा बनाकर कैसे पिएं?
फेफड़ों के लिए काली मिर्च का काढ़ा बनाना बेहद सरल है। काली मिर्च और अदरक को कूटकर पाउडर बना लें और इस काढ़े में थोड़ा गुड़ मिलाकर उबाल लें। फिर इसे छानकर इसमें थोड़ा सा नमक मिलाकर पिएं। इस प्रकार से गुनगुना काढ़ा पीने से गले और श्वसन नलिका को आराम मिलता है।




























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