प्री-मानसून और बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा बीमारियां दूषित पानी से फैलती हैं, जैसे टाइफाइड, पीलिया (Jaundice) और पेचिश। बारिश का पानी जब नदियों और जमीन में मिलता है, तो वह अपने साथ मिट्टी, बैक्टीरिया और बहुत सी अशुद्धियां लेकर आता है। आज हम पानी को साफ करने के लिए महँगी RO (Reverse Osmosis) मशीनों पर निर्भर हैं, जो पानी के आवश्यक खनिजों (Minerals) को भी नष्ट कर देती हैं।
प्राकृतिक चिकित्सा और हमारे पूर्वजों के पास पानी को शुद्ध और रोगाणु-मुक्त (Germ-free) करने का एक बहुत ही सस्ता और प्राकृतिक रसायन था— ‘फिटकरी’ ।
पानी साफ करने का जादुई क्रिस्टल
फिटकरी एक प्राकृतिक खनिज है। जब मटमैले या दूषित पानी में फिटकरी का एक टुकड़ा घुमाया जाता है, तो इसके रासायनिक गुण पानी में मौजूद सारी गंदगी, भारी तत्वों और बैक्टीरिया को आपस में बांध (Coagulate) देते हैं। कुछ ही घंटों में यह सारी गंदगी बर्तन के तले में बैठ जाती है और ऊपर एकदम शुद्ध, शीशे जैसा साफ और खनिज युक्त (Mineral-rich) पानी बच जाता है।
त्वचा और कीटाणुओं के लिए एंटी-सेप्टिक
फिटकरी केवल पानी साफ नहीं करती, यह एक बेहतरीन प्राकृतिक ‘एंटी-सेप्टिक’ भी है। बारिश के मौसम में यदि दूषित पानी में चलने से पैरों की उंगलियों के बीच फंगस (Athlete’s foot) या खुजली हो जाए, तो फिटकरी के पानी से पैर धोने पर वह तुरंत ठीक हो जाता है।
कार्यकारी संपादक, बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी
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