अगस्त (सावन-भादों) के महीने में जब झमाझम बारिश होती है, तो प्रकृति भले ही हरी-भरी हो जाए, लेकिन हमारे शरीर का ‘इम्यून सिस्टम’ (रोग प्रतिरोधक क्षमता) अपने सबसे निचले स्तर पर आ जाता है। हवा में भयंकर नमी, जगह-जगह जलभराव और सूरज के दर्शन न होने के कारण बैक्टीरिया, फंगस और खतरनाक वायरल इन्फेक्शन (डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, फ्लू) का प्रकोप तेजी से बढ़ता है। इस ऋतु-संधि में जब एलोपैथी की भारी-भरकम एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) हमारे लिवर और आंतों के गुड बैक्टीरिया को मार देती हैं, तब आयुर्वेद की सबसे पवित्र और शक्तिशाली एंटी-वायरल औषधि हमारी रक्षा करती है—वह है ‘पंचतुलसी’ (पांच प्रकार की तुलसी का अर्क)। यह मानसून में शरीर के चारों ओर एक अदृश्य सुरक्षा कवच बना देती है।
यह कैसे काम करता है? (यूजेनॉल और एंटी-माइक्रोबियल विज्ञान)
आयुर्वेद में तुलसी को ‘विष्णुप्रिया’ और ‘रसायन’ कहा गया है। जब पांच श्रेष्ठ तुलसियों—राम तुलसी, श्याम तुलसी, वन तुलसी, श्वेत (विष्णु) तुलसी और नींबू तुलसी—का अर्क मिलाया जाता है, तो इसके औषधीय गुण सौ गुना बढ़ जाते हैं। पंचतुलसी के अर्क में ‘यूजेनॉल’, कैम्फीन और विटामिन-सी जैसे अत्यंत शक्तिशाली वाष्पशील तेल (Essential oils) होते हैं। जब यह अर्क शरीर में जाता है, तो यह श्वसन तंत्र (Respiratory tract) की नली में जमे हुए ‘कफ’ को पिघलाता है। यह खून में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाता है और शरीर में घुसपैठ करने वाले किसी भी बाहरी वायरस के डीएनए (DNA) को नष्ट करके उसे पसीने या मल-मूत्र के रास्ते बाहर निकाल फेंकता है।
वायरल बुखार, डेंगू, कफ और अस्थमा का अचूक इलाज
सावन के महीने में जरा सा भीग जाने पर छींकें आना, गला बैठना, छाती में कफ जकड़ जाना और हल्का बुखार (Viral Fever) महसूस होना आम बात है। पंचतुलसी इन सभी का अचूक काल है। यह ‘इम्यूनोमॉड्यूलेटर’ की तरह काम करती है, यानी यह शरीर की अपनी सेना (White Blood Cells) को सक्रिय करती है। यह डेंगू और मलेरिया के बुखार में प्लेटलेट्स (Platelets) को गिरने से रोकती है, फेफड़ों की सूजन मिटाती है और दूषित जल या हवा से होने वाले संक्रमण (Infection) को शरीर में टिकने नहीं देती।
उपयोग की सरल और प्रामाणिक विधि
मानसून के पूरे मौसम में, सुबह उठकर खाली पेट एक गिलास हल्के गर्म पानी (उष्णोदक) में पंचतुलसी अर्क की 2 से 3 बूंदें डालकर घूंट-घूंट पिएं।
आप इसे अपनी सुबह-शाम की हर्बल चाय (काढ़े) या दूध में भी 1-2 बूंद डालकर पी सकते हैं। ध्यान रहे, अर्क को कभी भी उबलते हुए पानी में न डालें, पानी के हल्का गुनगुना होने पर ही मिलाएं ताकि इसके वाष्पशील तेल नष्ट न हों)।
यदि पंचतुलसी का अर्क उपलब्ध न हो, तो घर में मौजूद श्यामा और रामा तुलसी के 7-8 ताजे पत्तों को साफ धोकर पानी में उबालकर उस पानी का सेवन करें।
कार्यकारी संपादक, बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी
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