नई दिल्ली। देश के पशुपालकों और किसानों की आय में वृद्धि करने तथा दुग्ध व्यवसाय को अधिक मुनाफेदार बनाने के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने एक विशेष ‘दुग्ध उत्पादन फामूर्ला’ साझा किया है। इस फार्मूले के तहत कम लागत में अधिक और गुणवत्तापूर्ण दूध उत्पादन पर जोर दिया गया है, जिससे पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को एक नई दिशा मिल सके।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में पशुओं के पोषण की सबसे बड़ी भूमिका होती है। इस दिशा में ‘अजोला’ (एक प्रकार का फर्न/जलीय पौधा) पशुपालकों के लिए वरदान साबित हो रहा है। अजोला कम जगह और न्यूनतम खर्च में तैयार होने वाला पौष्टिक हरा चारा है। गोबर, पानी और 50 ग्राम ररढ के मिश्रण से यह महज 15 दिनों में तैयार हो जाता है। यह चारा न केवल प्रोटीन से भरपूर होता है, बल्कि गाय-भैंसों को इसे खिलाने से दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। इसके साथ ही यह धान की खेती के लिए भी एक बेहतरीन जैव-उर्वरक का काम करता है।
संतुलित पशु आहार: हरे चारे के साथ-साथ सूखे चारे और खनिज मिश्रण (मिनरल मिक्चर) का सही अनुपात। अजोला का उपयोग: प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए पारंपरिक दाने के विकल्प के रूप में अजोला को शामिल करना।





























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