एक नगर में एक राजा थे, जिन्हें नींद नहीं आती थी। उन्होंने कई हकीमों से इलाज करवाया, पर कोई फायदा नहीं हुआ। किसी ने सलाह दी कि अगर कोई आदमी कहानी सुनाए, तो सुनते-सुनते उन्हें नींद आ जाएगी। यह सुनकर राजा ने घोषणा करवाई कि अगर कोई मुझे कहानी सुनाकर सुला दे, तो मैं उसको दस हज़ार स्वर्ण-मुद्राएं इनाम में दूंगा। इनाम के लालच में राजा को दूर-दूर से लोग कहानी सुनाने आए, लेकिन कोई भी राजा को सुला नहीं पाया।
इस बात की चर्चा दूर-दूर तक थी। एक पक्षी पकड़ने वाले ने कहा कि मैं राजा को सुला सकता हूँ और वह राजा के पास जाकर बोला, ‘मैं आज रात ऐसी कहानी सुनाऊंगा, जिससे आपको नींद आ जाएगी। लेकिन एक शर्त है, आपको कहानी सुनते हुए हुंकारी भरनी होगी।’ राजा ने सहमति दे दी। वह कहानी सुनाने लगा, ‘एक बार मेरे पिताजी जंगल में घूमने गए। साथ में मेरे पिताजी के पिताजी भी थे। उस जंगल में एक हज़ार पेड़ थे। एक-एक पेड़ पर सौ-सौ पिंजरे लटके हुए थे। एक-एक पिंजरे में दस-दस पक्षी थे।’ राजा हुंकारी भरते हुए बोले, ‘फिर क्या हुआ?’ उसने आगे कहा, ‘मेरे पिताजी के पिताजी ने सोचा कि क्यों न इन पंछियों को आज़ाद करके पुण्य प्राप्त किया जाए। फिर उन्होंने एक पिंजरा खोला और एक पक्षी उड़ा दिया फुर्र….। फिर दूसरा पक्षी उड़ा दिया फुर्र…., फिर तीसरा पक्षी उड़ा दिया फुर्र…। वह व्यक्ति ऐसे ही पक्षी और पिंजरे गिनता रहा।’ कहानी सुनते-सुनते राजा को नींद आ गई। जब राजा सुबह जागे तब भी वो कहानी सुना रहा था। राजा बोले, ‘अभी तक कहानी पूरी नहीं हुई?’ तभी वह व्यक्ति बोला, ‘अभी पाँच सौ पिंजरे बाकी हैं।’ राजा ने उसकी चतुरता से अतिप्रसन्न होकर उसे बहुत सारा धन दिया।



























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