गर्मियों की छुट्टियां शुरू होते ही बच्चे दिन भर घर के बाहर या धूप में खेलते हैं। तेज गर्मी और पसीने के कारण उनकी ऊर्जा बहुत जल्दी खत्म हो जाती है। ऐसे में माता-पिता तुरंत बाजार से टीवी विज्ञापनों में दिखने वाले कृत्रिम ‘ग्लूकोज पाउडर’ या रंग-बिरंगे एनर्जी ड्रिंक्स लाकर बच्चों को पिलाने लगते हैं। प्राकृतिक चिकित्सा के नजरिए से, यह बच्चों के लिवर और भविष्य के स्वास्थ्य के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ है। असली ऊर्जा रसायनों के डिब्बे में नहीं, बल्कि हमारी रसोई में छिपी है।
कृत्रिम ग्लूकोज का भयानक सच
बाजार में मिलने वाले अधिकांश ग्लूकोज पाउडर में 90% से अधिक ‘रिफाइंड शुगर’ (सफेद चीनी), कृत्रिम रंग और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं। जब बच्चा इसे पीता है, तो खून में शुगर का स्तर अचानक (Spike) बढ़ जाता है। इससे बच्चा कुछ पल के लिए तो उछल-कूद करता है, लेकिन थोड़ी ही देर बाद उसका शरीर पहले से भी ज्यादा थक कर निढाल हो जाता है। यह बच्चों की हड्डियों से कैल्शियम सोख लेता है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को गिरा देता है।
नीबू और मिश्री: प्रकृति का असली इलेक्ट्रॉल
बच्चों के पसीने से जो नमक और खनिज (Minerals) बह जाते हैं, उनकी भरपाई के लिए नींबू-पानी सबसे बड़ा अमृत है। नीबू में प्राकृतिक विटामिन-सी और मिश्री (धागे वाली) में गजब की शीतलता होती है।
दादी माँ का अचूक प्राकृतिक नुस्खा
खेलकर लौटे बच्चों के लिए ‘देसी एनर्जी ड्रिंक’: जब बच्चा तेज धूप से खेलकर आए, तो उसे फ्रिज का पानी बिल्कुल न दें। मटके के एक गिलास सादे पानी में आधा नींबू निचोड़ें, एक चम्मच पिसी हुई धागे वाली मिश्री और एक चुटकी सेंधा नमक (Rock Salt) मिला लें। यह प्राकृतिक ‘इलेक्ट्रॉल’ बच्चे के शरीर को 5 मिनट के भीतर, भीतर से ठंडा कर देगा और उसके शरीर में ऊर्जा का परमानेंट (स्थायी) संचार करेगा।
कार्यकारी संपादक, बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी
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