गणेश चतुर्थी से प्रथम पूज्य देवता गणेश जी का जन्मोत्सव प्रारम्भ है, जो अनन्त चतुर्दशी तक चलेगा। इस तिथि को उत्सव के अंतिम दिन के रूप में चिह्नित किया गया है, इसके अगले दिन भक्तगण भगवान् गणेश जी की मूर्तियों को सरोवरों में विसर्जित करके उन्हें विदाई देते हैं।
ज्ञातव्य है हमारे भारत देश में गणपति बप्पा का जन्मोत्सव दस दिनों तक अत्यन्त ही धूमधाम से मनाया जाता है। हिन्दूधर्मावलम्बियों के हर तीसरे-चौथे घर में और हर बस्ती में, नगरों में जगह-जगह गणेश प्रतिमाएं स्थपित करके उनकी विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। कहते हैं कि भगवान् गणेश जी की पूजा-अर्चना, पूर्ण सात्विकता के साथ करने पर बुद्धि-विवेकरूपी चेतनात्मक शक्ति का विकास होता है।




























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