आहार अर्थात् भोजन। यदि आपका खान-पान सही और समयबद्ध नहीं है तो आप किसी भी गंभीर रोग की चपेट में आ सकते हैं। विहार का अर्थ है पैदल चलना या भ्रमण करना। क्या आप इतना पैदल चल लेते हैं जिससे की आपकी पाचनक्रिया बलशाली बनीं रहे। यदि नहीं तो आपके लिए खतरे की सूचना है।
आहार- यह बहुत ज़रूरी है अन्यथा आप कितने ही आसन-प्राणायाम करते रहें, वे निरर्थक ही सिद्ध होंगे। उचित आहार का चयन करें और निश्चित समय पर खाएं। आहार में शरीर के लिए उचित पोषकतत्त्व होना ज़रूरी है। ना कम खाएं और ना ज्यादा, मसालेदार तो बिल्कुल ही नहीं। निरोगी रहकर लम्बी उम्र चाहते हैं तो आहार पर ध्यान दें। यौगिक आहार का चयन करें।
विहार- विहार करना हमेशा से ही प्रचलित है और रहेगा। खुली हवा में पैदल विचरण करना। कहते हैं कि सौ दवाई और एक घुमाई।
घूमने फिरने जाएं और थोड़ा नंगे पैर भी चले। योग और आयुर्वेद में कहा गया है कि पैर यदि ज़्यादा देर तक ढंके या बंधे हैं तो इसका असर हमारी श्वास पर होता है। विहार करने से शरीर में अतिरिक्त चर्बी इक्कठी नहीं होती तथा स्फूर्ति बनी रहती है। पाचनक्रिया के लिए यह लाभदायक है।
योग- यदि आपके पास समय नहीं है कि योगासन किया जाए तो योग की हस्त मुद्राओं का सहारा लें। अंग संचालन, हास्य योग, ध्यान, प्राणायाम और योगनिद्रा का अभ्यास करते रहने से अतिरिक्त ऊर्जा का संचार होगा। यह बहुत ही कम समय में हो सकता है। सभी को पाँच-पाँच मिनट में किया जा सकता है। आप चाहें तो योगनिद्रा रात में बिस्तर पर सोते वक्त कर सकते हैं।
हंसने पर कोई पाबंदी नहीं और जब चाहें तब मुंह खोल कर हंसे। प्राणायाम में अनुलोम-विलोम और ध्यान में विपश्यना का सहारा ले सकते हैं। यदि आसन करना चाहें तो हनुमानासन, पादहस्त आसन, चंद्रासन, योग मुद्रा, उष्ट्राषन, पवन मुक्तासन करें तथा इनके विलोम आसनों को भी जानें।




























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