नई दिल्ली। वायुप्रदूषण शरीर के अन्य अंगों के अलावा मस्तिष्क को अधिक प्रभावित करता है, जिसकी वजह से तनाव बढ़ता है और संज्ञानात्मक क्षमता में कमी आती है। दिल्ली में इन दिनों वायु की गुणवत्ता ख़्ातरनाक सीमा तक पहुंच चुकी है।
विषय विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि वायु प्रदूषण न केवल फेफड़ों को प्रभावित करता है, बल्कि हृदय और मस्तिष्क जैसे अन्य प्रमुख अंगों को भी प्रभावित करता है। बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण बुजुर्गों, स्कूल जाने वाले बच्चों और गर्भवती महिलाओं में सिरदर्द, चिंता, चिड़चिड़ापन, भ्रम और संज्ञानात्मक क्षमताओं में कमी के मामलों में अचानक वृद्धि हुई है।
विषय विशेषज्ञों का मानना है कि अस्थमा, क्रानिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और इस्केमिक हृदय रोग जैसी पहले से मौज़ूद स्थितियों वाले रोगियों को घर के अंदर रहने की कोशिश करनी चाहिए और निवारक उपाय करने चाहिए।
देश के कई हिस्सों में वायुप्रदूषण का स्तर काफी हद तक बढ़ गया है। दिल्ली-एनसीआर में लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखकर राज्य सरकार ने ग्रैप-4 लागू करने का फैसला किया है। अब तक ग्रैप-3 लागू था, लेकिन प्रदूषण के स्तर में किसी तरह की गिरावट दजऱ् नहीं की गई, जिसके बाद सरकार को यह फैसला लेना पड़ा है।
दिल्ली में नवंबर की शुरुआत से ही वायुप्रदूषण का स्तर ख़्ातरे की निशान को पार कर गया है। सरकार के द्वारा प्रदूषण को कम करने के लिए जो $कदम उठाए जा रहे हैं, उसके कोई सार्थक परिणाम परिलक्षित नहीं हैं। गौरतलब है कि दिल्ली के सभी शहरों में फिलहाल एक्यूआई 300 के पार हंै। प्रदूषण का सबसे खराब स्तर आनंद विहार में है।
दिनांक 06 नवंबर की सुबह आठ बजे के डेटा के मुताबिक, आनंद विहार का वायुप्रदूषण स्तर 922 दजऱ् किया गया है। वहीं, शाहदरा में 586, जहांगीरपुरी में 543, आरके पुरम में 408, ओखला में 400, गाजियाबाद में 533, मुंडका में 633 एक्यूआई दजऱ् किया गया।
ग्रैप का चौथा चरण
दिल्ली के हालात को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने ग्रैप-4 लागू कर दिया है, जिसके तहत वायुप्रदूषण को कम करने के लिए कई कदम उठाए जाते हैं।
दिल्ली के बाहर से आने वाले सभी ट्रकों को प्रवेश पर पाबंदी रहेगी। हालांकि, ज़रूरी सामान लाने वाले सीएनजी और इलेक्ट्रिक ट्रकों पर को आवागमन की अनुमति रहेगी। एनसीटी दिल्ली व एनसीआर में डीजल चलित चार पहिया वाहनों पर रोक रहेगी, लेकिन आपातकालीन वाहनों को छूट दी गई है। एनसीआर में उद्योगों पर पाबंदी लगा दी गई है, जहां पीएनजी ईंधन की सुविधा नहीं है। हालांकि, दूध व डेयरी उत्पादों और मेडिकल उपकरणों से जुड़े उद्योगों को छूट दी जाएगी।
निर्माण व विध्वंस गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है और फ्लाईओवर, राजमार्ग, पुल व पाइपलाइन समेत अन्य गतिविधियों पर भी रोक रहेगी। एनसीआर राज्य सरकारें सार्वजनिक, निगम और निजी दफ्तरों में 50 फीसदी क्षमता के साथ वर्क फ्रॉम होम की छूट दे सकती है। राज्य सरकारें स्कूल व कॉलेज को बंद करने के साथ गैर-आपातकालीन गतिविधियों को बंद कर सकती है।




























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