बचपन में प्राय: घुटने पर चोट या खरोंच लग जाती है। ध्यान रखें, घुटने पर लगी हल्की चोट या खरोंच के कारण भी त्वचा में इन्फेक्शन हो सकता है। जब चोट लगती है तो, उस स्थान पर गंदी मिट्टी चिपक जाती है। इससे त्वचा में संक्रमण फैलने लगता है। सक्रमण से बचने के कुछ निम्नांकित साविधानियां बरतना आवश्यक हैं–
घुटने पर चोट या खरोंच लगने पर पहले ब्लीडिंग बंद करने हेतु उपाय करें। किसी कॉटन या साफ पट्टी की मदद से चोट के आस-पास दबाव दें, जिससे ब्लीडिंग रुक जाए। ब्लीडिंग बंद होजाने के बाद चोट या खरोंच को साफ और ठंडे पानी से धो लें। चोट को हाथ लगाने से पहले साबुन और पानी से हाथों को धोना ज़रूरी है। एक साफ कॉटन की मदद से चोट पर लगी गंदगी और चोट को साफ कर लें। खरोंच या चोट को बैंडेज से कवर कर लें। इससे चोट या खरोंच को जल्दी ठीक करने में मदद मिलेगी। बैंडेज को गंदा होजाने पर बदल दें। चोट के हिस्से को ज़्यादा से ज़्यादा ड्राई रखने का प्रयास करें।
चोट या खरोंच लगने पर ये न करें
खरोंच या चोट को कुरेदने की कोशिश न करें। इससे खुजली, सूजन या जलन का एहसास हो सकता है। चोट में नमी जमा न होने दें। इससे इन्फेक्शन की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। चोट पर किसी तरह स्किन क्रीम का प्रयोग न करें। इससे आपकी तकलीफ बढ़ सकती है।
चोट को मानसून के दिनों में कवर न करें, इससे मॉइश्चर जमा हो सकता है और संक्रमण फैल सकता है। लोग घाव को साफ करने के लिए घरेलू उपायों की मदद लेते हैं, लेकिन ऐसा करने से बचें। घरेलू उपाय समस्या को कम करने की बजाय बढ़ा देते हैं।
मेडिकल मदद कब लें?
अगर चोट लगने के साथ बुखार आ गया है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। किसी जानवर के काटने पर चोट या खरोंच लगी है, तो भी मेिडकल हेल्प लेना चाहिए। चोट से किसी प्रकार का पीला या ग्रे रंग का फ्लूड निकलने पर डॉक्टर से सलाह लें।





























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