उज्जैन। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन डा. श्रीधर सोमनाथ ने कहा है कि अंतरिक्ष अनुसंधान के मूल स्रोत संस्कृत के प्राचीन ग्रंथ हैं। संस्कृत साहित्य में ज्ञान-विज्ञान की अविरल धारा है, जो बहती चली आ रही है। आवश्यकता है, उस ज्ञान और विज्ञान का उपयोग कर संस्कृत को विश्व में पुन: स्थापित करने की।
डॉ. सोमनाथ ने बतौर सारस्वत अतिथि महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन के चतुर्थ दीक्षा समारोह में बुधवार को विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उक्त बातें कहीं। उन्होंने कहा कि शून्य से अनंत (इनफिनिटी) तक का ज्ञान हमें संस्कृत से प्राप्त हुआ है। भारतीय ज्योतिष के मूल ग्रंथों में अंतरिक्ष अनुसंधान का आधार रहस्य छिपा है।
एक छात्र ने प्रश्न किया कि अंतरिक्ष यान बनाने में क्या नासा की तरह इसरो भी क्वालिटी मेंटेन करता है तो मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा कि करना ही पड़ेगा। कई परीक्षण करने के बाद ही सेटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा जाता है। एक स्कू्र भी ढीला रह जाए तो परिणाम बहुत बुरा होता है।





























Views Today : 27
Views Last 7 days : 174
Views Last 30 days : 651
Views This Year : 9332
Total views : 109805
Who's Online : 0
Your IP Address : 216.73.216.41