नई दिल्ली। रेपो दर वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी फौरी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए केंद्रीय बैंक से कजऱ् लेते हैं। इस दर में वृद्धि का मतलब है कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिया जाने वाला आवास और वाहन ऋण तथा कंपनियों के लिए क़र्ज़ महंगा होगा और मौज़ूदा ऋण की मासिक किस्त (ईएमआई) बढ़ेगी।
यह लगातार दूसरी बार है, जब मुख्य ब्याज दर में धीमी दर से वृद्धि की गई है। हालांकि, आरबीआई ने मुख्य मुद्रास्फीति (मुख्य रूप से विनिर्माण क्षेत्र की महंगाई) ऊंची रहने की भी बात कही है। इसके साथ आने वाले समय में नीतिगत दर रेपो में और वृद्धि का संकेत दिया है। केंद्रीय बैंक ने अगले वित्त वर्ष में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर 6.4 फीसदी रहने का अनुमान रखा है। यह चालू वित्त वर्ष के सात फीसदी के वृद्धि दर के अनुमान से कम है।
रेपो दर हुआ 06.50 प्रतिशत
मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की सोमवार से शुरू हुई तीन दिन की बैठक में लिए गए निर्णय के बाद आरबीआइ गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, ‘एमपीसी ने नीतिगत दर रेपो को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 6.50 प्रतिशत करने का निर्णय किया है। मौद्रिक नीति समिति के छह सदस्यों में से चार ने रेपो दर बढ़ाने और उदार रुख को वापस लेने पर ध्यान देने के पक्ष में मतदान किया।



























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