नई दिल्ली। केंद्र सरकार के द्वारा 2014 से लेकर अब तक यानि 08 वर्ष में गंगा की सफाई पर 13,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर दिए गए, लेकिन गंगा नदी साफ नहीं हुई। नमामि गंगा योजना से उत्तरप्रदेश को सबसे अधिक धनराशि आवंटित की गई है। स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन ने शुक्रवार को राष्ट्रीय गंगा परिषद को इसके संबंध में सूचना दी।
तीन साल बाद हुई परिषद की बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए की। प्रधानमंत्री इस बैठक के लिए कोलकाता जाने वाले थे, लेकिन अपनी मां के निधन के कारण इसे वर्चुअली संबोधित किया।
उपलब्ध विवरण के अनुसार केंद्र ने वित्तीय वर्ष 2014-15 से 31 अक्टूबर 2022 तक नमामि गंगे परियोजना को कुल 13,709.72 करोड़ रुपये जारी किए हैं। उस राशि का अधिकांश 13,046.81 करोड़ रुपये खर्च किया गया। इसमें से 4,205.41 करोड़ रुपये उत्तरप्रदेश को जारी किए गए, जो राज्यों में सबसे अधिक है। गंगा की 2,525 किलोमीटर लंबाई का लगभग 1,100 किलोमीटर उत्तरप्रदेश में पड़ता है। केंद्र सरकार ने जून 2014 में 20,000 करोड़ रुपये के कुल बजटीय परिव्यय के साथ नमामि गंगे कार्यक्रम शुरू किया था। नमामि गंगे परियोजना दुनिया की 10 प्रमुख पहल में शामिल हुई है।
उत्तरप्रदेश के बाद बिहार में 3,516.63 करोड़ रुपये, पश्चिम बंगाल में 1,320.39 करोड़ रुपये, दिल्ली में 1,253.86 करोड़ रुपये, उत्तराखंड 1,117.34 करोड़ रुपये, झारखंड में, 250 करोड़ रुपये, हरियाणा में 89.61 करोड़ रुपये, राजस्थान में 71.25 करोड़ रुपये, हिमाचलप्रदेश में 3.75 करोड़ रुपये और मध्यप्रदेश में 9.89 करोड़ रुपये) नमामि गंगे परियोजना के तहत खर्च किए गए।





























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