भोपाल। मोक्षदायिनी नर्मदा नदी के पानी में शैवाल बढ़ गए हैं और कोलीफॉर्म तथा ई-कोलाई बैक्टीरिया भी पाए गए हैं। इनके असर से पानी का रंग व स्वाद भी बदल गया है। जांच में पाया गया है कि बड़वानी से पाँच किमी दूर राजघाट के कुकरा गांव में नर्मदा का पानी अब पीने और भोजन बनाने लायक भी नहीं बचा है।
आइएस-10500 मानकों के तहत की गई जांच में यह खुलासा हुआ है। जांच मुंबई की निजी लैब में की गई। रिपोर्ट के अनुसार यहाँ के पानी से खेती में सिंचाई भी कुछ फसलों में की जा सकती है, सभी में नहीं।
नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रणेता मेधा पाटकर, देवेंद्र सोलंकी, कैलाश अवास्या का कहना है कि विश्व नदी दिवस पर 26 सितंबर से मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में जनजागरण यात्रा शुरू होगी।
मानपुर (इंदौर संभाग) की अजनार नदी जो कारम नदी से होते हुए नर्मदा में मिलती है, उसके परीक्षण में भी प्रदूषण का पता चला था। मुख्य दोषी पर आज तक कार्रवाई नहीं हो पाई। नर्मदा पट्टी के शहरों में अस्पताल बढ़ रहे हैं, लेकिन नर्मदा की स्थिति सुधारने की कवायद नहीं हो रही है।
अनेक बीमारियों का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा बढऩे पर पथरी की समस्या हो सकती है। कई बार किडनी पर भी इसका असर होता है। नाइट्रेट 10 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज़्यादा मात्रा होने पर थायराइड, श्वसन तंत्र संबंधी रोग, गर्भपात, पेट या मूत्रपिंड के कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा पैदा होता है।





























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