रुद्रप्रयाग। केदारनाथ त्रासदी को नौ वर्ष पूरे हो चुके हैं, उस कालखण्ड के भयानक मंजर को याद करके आज भी रोंगटे खड़े होजाते हैं, लेकिन वर्तमान में एक बार पुन: केदारनाथ अपने भव्यस्वरूप को प्राप्त कर चुका है। तीर्थयात्री अब पुन: अतिउत्साह से बाबा के दर्शन हेतु व केदारपुरी के भव्यस्वरूप का अवलोकन करने हेतु पहुँचने लगे हैं।
दर्शनार्थियों की संख्या लगातार बढ़तेक्रम कें है। सरकार ने केदारपुरी को आपदा की दृष्टि से अब काफी सुरक्षित बना दिया है। केदारनाथ धाम के चारोंओर सुदृढ़ व्यवस्था की है।
गौरतलब है कि मंदाकिनी व सरस्वती नदी में बाढ़ सुरक्षा कार्य किए गए हैं। धाम में पहले की अपेक्षा अब तीर्थयात्रियों को और अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
16-17 जून 2013 को आई आपदा के बाद केदारनाथ में हुई तबाही का दृश्य अतिडरावना था और उस समय प्रतीत हो रहा था कि भविष्य में केदारनाथ यात्रा शुरू हो पाएगी भी या नहीं, लेकिन बीते नौ वर्षों में यात्रा के प्रति तीर्थयात्रियों का उत्साह दोगुना परिलक्षित है।
अनुपम व्यवस्था
भीमबली से केदारनाथ तक दस किमी नया रास्ता तैयार किया गया है। इसमें छोटी लिनचोली, लिनचोली, रुद्रा प्वांइट समेत कई छोटे बाज़ार बन चुके हैं और केदारनाथ पैदल मार्ग भी पहले के मुकाबले काफी अच्छा व सुरक्षित हो गया है। तीन से चार मीटर चौड़े पैदल मार्ग पर रेलिंग लगाई गई है। लिनचोली, छोटी लिनचोली, रुद्रा प्वाइंट समेत कई पड़ाव विकसित कर यहां यात्रियों के ठहरने की व्यवस्थाएं की गई हैं। इसी का परिणाम है कि पहले की अपेक्षा अधिक तीर्थयात्री केदारनाथ धाम पहुंच रहे हैं।
नौ हेली कंपनियों को उड़ान की अनुमति
प्राकृतिक आपदा के बाद केदारनाथ के लिए हेली सेवा बढ़ी है। इस समय नौ हेली कंपनियों को केदारनाथ के लिए उड़ान भरने की अनुमति दी गई है। इस वर्ष अब तक 70 हज़ार से अधिक तीर्थयात्री हेली सेवा से बाबा के दर्शन करने हेतु पहुंच चुके हैं। कुल यात्रियों में से लगभग 15 प्रतिशत यात्री हेली सेवा का लाभ उठा रहे हैं।




























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