सावन और भादों की झमाझम बारिश जहाँ एक ओर प्रकृति को शीतलता देती है, वहीं हमारे शरीर के भीतर ‘वात’ और ‘कफ’ का भयंकर संचय कर देती है। नमी और ठंडी हवाओं के कारण जठराग्नि मंद पड़ जाती है, जोड़ों में दर्द उभर आता है और छाती में जकड़न होने लगती है। ऐसे मौसम में जब शरीर का ‘थर्मोस्टेट’ गिर जाता है, तब आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली ‘उष्ण’ (गर्म) और ‘तीक्ष्ण’ औषधि—लहसुन (Garlic)—एक जादुई हीटर का काम करती है। यह केवल एक रसोई का मसाला नहीं, बल्कि वात और कफ रोगों को उखाड़ फेंकने वाला ‘ब्रह्मास्त्र’ है।
यह कैसे काम करता है? (एलीसिन और उष्ण-तीक्ष्ण विज्ञान)
लहसुन में ‘एलीसिन’ (Allicin) नामक एक अत्यंत शक्तिशाली सल्फर यौगिक पाया जाता है, जो इसका मुख्य औषधीय तत्व है। आयुर्वेद के अनुसार, लहसुन रस में ‘कटु’ (तीखा) और तासीर में अत्यंत ‘उष्ण’ (गर्म) होता है। जब यह शरीर में जाता है, तो इसकी भयंकर गर्मी जमे हुए कफ (Mucus) को मोम की तरह पिघला देती है। यह रक्त वाहिकाओं (Blood vessels) को चौड़ा करता है, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है और आंतों में रुकी हुई ‘वात’ (गैस) को बाहर धकेल कर मंद पड़ी जठराग्नि को फिर से प्रज्वलित कर देता है।
जोड़ों का दर्द, भयंकर गैस और कोलेस्ट्रॉल का अचूक इलाज
मानसून में वात बढ़ने से घुटनों, कमर और जोड़ों में भयंकर दर्द (Arthritis) और अकड़न शुरू हो जाती है। लहसुन इस ‘आमवात’ का सबसे बड़ा काल है। यह नसों की सूजन (Inflammation) को खत्म करता है। इसके अलावा, मंद पाचन के कारण बनने वाली गैस, सीने की जकड़न और रक्त की अशुद्धियों (बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल/Heart Blockage) को भी यह प्राकृतिक रूप से काटता है। यह फेफड़ों को नमी और फंगस से बचाता है।
दादी माँ का अचूक प्राकृतिक नुस्खा
लहसुन का सिद्ध तेल (जोड़ों के दर्द और कान दर्द में): सावन में यदि सीलन के कारण जोड़ों में दर्द हो या ठंडी हवा से कान में दर्द उठ जाए, तो 50 ml सरसों या तिल के तेल में लहसुन की 5-6 कलियां (कुचलकर) और आधा चम्मच अजवाइन डालकर धीमी आंच पर तब तक गर्म करें जब तक लहसुन काला न पड़ जाए। इस तेल को छानकर कांच की शीशी में रख लें। इस ‘उष्ण’ तेल की मालिश से जोड़ों का दर्द और सूजन रातों-रात गायब हो जाएगी। (कान दर्द में हल्का गुनगुना करके केवल 1-2 बूंद प्रयोग करें)।
उपयोग की सरल और प्रामाणिक विधि
•लहसुन को कभी भी सीधा निगलना नहीं चाहिए, क्योंकि एलीसिन तभी सक्रिय होता है जब उसे कुचला या चबाया जाए।
•सावन-भादों में सुबह खाली पेट लहसुन की 1 या 2 कलियों को छीलकर हल्का सा कुचल लें और 5 मिनट हवा में खुला छोड़ दें (इससे एलीसिन पूरी तरह बन जाता है)।
•इसे थोड़े से ‘शुद्ध गाय के घी’ के साथ चबाकर खाएं या हल्के गुनगुने पानी (उष्णोदक) के साथ लें। घी लहसुन की रूक्षता (Dryness) को खत्म करता है।
•जिन लोगों को कच्चा लहसुन बहुत गर्म करता है, वे इसे तवे पर हल्का सा भूनकर (Dry roast) खा सकते हैं, इससे पेट में जलन नहीं होती लेकिन इसके वातनाशक गुण बरकरार रहते हैं।
कार्यकारी संपादक, बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी
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