प्री-मानसून की उमस शुरू होते ही हर घर में मच्छरों का आतंक शुरू हो जाता है। इनसे बचने के लिए हम तुरंत बाजार से मच्छर मारने वाली कॉइल, लिक्विड वेपोराइजर या स्प्रे ले आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक बंद कमरे में पूरी रात जलने वाली एक कॉइल 100 सिगरेट के बराबर जहरीला धुआं छोड़ती है? यह धीमा जहर हमारे और हमारे बच्चों के फेफड़ों में जाकर अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और यहां तक कि नर्वस सिस्टम की भयंकर बीमारियां पैदा करता है। प्राकृतिक चिकित्सा में मच्छरों को भगाने के लिए ‘नीम’ और ‘कपूर’ को सबसे सुरक्षित और शक्तिशाली अस्त्र माना गया है
नीम का तेल: प्राकृतिक रिपेलेंट
नीम में मौजूद ‘एजाडिराक्टिन’ एक ऐसा प्राकृतिक रसायन है जिसकी गंध से मच्छर कोसों दूर भागते हैं। इसके विपरीत, बाजार के केमिकल वाले लिक्विड केवल मच्छरों को बेहोश करते हैं, जबकि नीम का तेल मच्छरों के प्रजनन को ही रोक देता है।
कपूर (Camphor): हवा की शुद्धि और शांति
शुद्ध देसी कपूर (भीमसेनी कपूर) जब जलता है, तो वह केवल मच्छरों को ही नहीं भगाता, बल्कि हवा में मौजूद वायरल बैक्टीरिया को भी नष्ट कर देता है। इसकी सुगंध से फेफड़ों को नुकसान नहीं होता, बल्कि दिमाग को गहरी शांति मिलती है।
मेरी राय में: अपने घर को गैस चैंबर न बनाएं। मच्छरों से बचने के लिए जहर सांसों में खींचने के बजाय, प्रकृति के इस शुद्ध और सुगन्धित ‘नीम-कपूर’ के विकल्प को अपनाएं। जब आपके फेफड़े शुद्ध हवा में सांस लेंगे, तो आपकी ‘जीवनी शक्ति’ और इम्युनिटी स्वतः ही मजबूत हो जाएगी।
दादी माँ का अचूक प्राकृतिक नुस्खा
मच्छरों के लिए ‘देसी वेपोराइजर’: बाजार की खाली हो चुकी वेपोराइजर की रिफिल मशीन लें। उसे खोलकर उसमें शुद्ध ‘नीम का तेल’ भर दें और उसमें 2-3 टिकिया शुद्ध कपूर (Camphor) की पीसकर डाल दें। अब इसे वापस बंद करके मशीन में लगा दें और स्विच ऑन करें। यह प्राकृतिक वेपोराइजर आपके कमरे को मच्छरों से तो बचाएगा ही, साथ ही इसकी हल्की-हल्की औषधीय खुशबू आपके परिवार को वायरल बीमारियों से भी सुरक्षित रखेगी।
• भ्रांति (Myth): मच्छर हमेशा गंदगी में पनपते हैं और केवल रात के अंधेरे में ही काटते हैं।
सच (Fact): यह एक बहुत बड़ा भ्रम है। मलेरिया और साधारण मच्छर रात में काट सकते हैं, लेकिन डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने वाला ‘एडीज’ (Aedes) मच्छर हमेशा दिन के उजाले में काटता है, और यह गंदे पानी में नहीं, बल्कि घरों के अंदर रखे साफ और स्थिर पानी (जैसे गमलों, एसी के पानी या खुले बर्तनों) में पनपता है। दिन में भी प्राकृतिक बचाव जरूरी है।
कार्यकारी संपादक, बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी
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