नई दिल्ली। दिनांक 11 जुलाई, दिन-शनिवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की उच्च स्तरीय गवर्निंग काउंसिल की बैठक में भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे बड़ा और युगांतकारी निर्णय लिया गया। बैठक में शामिल 22 राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों की सहमति के बाद केंद्र सरकार ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक देश, एक चुनाव) के रोडमैप को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है। इसके तहत देश में साल 2029 से लोकसभा, सभी राज्यों की विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ एक ही चरण में संपन्न कराए जाएंगे।
2027 तक पूरा होगा क़ानूनी ढांचा
बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय गृहमंत्री ने बताया कि विधि आयोग और रामनाथ कोविंद समिति की सिफारिशों के आधार पर आगामी संसद सत्र में संविधान संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा। इस बड़े सुधार के लिए राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल संतुलित करने हेतु एक ‘अस्थायी ट्रांजिशन फॉमूर्ला’ तैयार किया गया है। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से देश के राजकोष को सालाना लगभग 50,000 करोड़ रुपए की बचत होगी और बार-बार लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता से विकास कार्यों में लगने वाला ब्रेक हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।





























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