भोपाल। प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में पाँच जिले ऐसे हैं जहां 10 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं का 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग नहीं हो पाई है। यानी न तो मतदाता और न ही मतदाता के रिश्तेदार का नाम का वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान हो पा रहा है। अब इन्हें भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मान्य किए गए पहचान के 12 दस्तावेज में से कोई एक देना होगा। ऐसे सबसे अधिक मामले शहडोल में 17 प्रतिशत, सतना में 15, मैहर में 10, मुरैना और जबलपुर में 11-11 प्रतिशत हैं।
यह आंकड़ा ज़िलों में कुल डिजिटाइजेशन में से है। इसके उलट, कई ज़िले ऐसे भी है कि 95 प्रतिशत से अधिक डाटा मिलान हो गया है। यानी यहां अब पाँच प्रतिशत से कम मतदाताओं के ही नाम कटने का जोखिम है। वह भी तब जब वे पहचान के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा मान्य किए गए 12 दस्तावेजों में से कोई एक अपनी पहचान के लिए नहीं दे पाएंगे।




























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