Homeआयुर्वेदकई बीमारियों को ठीक कर सकते हैं पपीते के पत्ते

कई बीमारियों को ठीक कर सकते हैं पपीते के पत्ते

 पपीते के पत्ते, जिन्हें हम बेकार समझकर फेंक देते हैं, आपको पता होना चाहिए कि ये पत्ते कई गंभीर बीमारियों में एक संजीवनी बूटी का काम कर सकते हैं। डेंगू से लेकर लिवर की समस्या और पाचन से जुड़ी परेशानियों तक पपीते के पत्तों का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है।

आयुर्वेद में पपीते के पत्तों  को एक खास जगह मिली है। विशेषज्ञ बतलाते हैँ कि इनमें एंटीओक्स्सीडेंट, पैपेन, क्वेरसेटिन, विटामिन ए, सी और के जैसे ढेरों गुण होते हैं, जो हमारे शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं और बीमारियों से लड़ने की शक्ति देते हैं। आयुर्वेद में पपीते के पत्तों को तिक्त रस वाला बताया गया है, जो शरीर के पित्त को शांत करने में मदद करता है। चरक संहिता और भावप्रकाश निघंटु जैसे हमारे पुराने आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी इन्हें कीटाणुनाशक, सूजन कम करने वाला (शोथहर) और खून साफ करने वाला (रक्त शोधक) बताया गया है। अब सवाल उठता है कि पपीते के पत्तों का उपयोग कैसे करें?

 पपीते के पत्तों का रस: प्लेटलेट्स बढ़ाने से लेकर लिवर सुरक्षा तक में कारगर है। रस बनाने के लिए ताजे साफ पपीते के पत्ते लें, उनके डंठल हटा दें और उन्हें मिक्सर में पीसकर रस निकाल लें और सुबह खाली पेट 5 से 10 मिलीलीटर (एक से दो चम्मच) रस का सेवन किया जा सकता है। इससे निम्नांकित लाभ हैं—

डेंगू में रामबाण: यह प्लेटलेट्स काउंट बढ़ाने में बेहद मददगार माना जाता है, जिससे डेंगू के मरीज को जल्दी रिकवरी में मदद मिलती है और शारीरिक कमजोरी दूर होती है।

लिवर का रक्षक: इसमें मौजूद कैरपा पेन्टिन और अन्य एल्कलॉइड लिवर को एंटीओक्स्सीडेंट स्ट्रेस से बचाते हैं, जिससे लिवर डैमेज और अन्य बीमारियों का खतरा कम होता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ की रिसर्च भी बताती है कि इसका नियमित सेवन लिवर फंक्शन को बेहतर कर सकता है और हेपेटाइटिस में भी लाभकारी हो सकता है।

पाचन में सुधार: पपीते के पत्तों में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो गैस, अपच और कब्ज जैसी पेट संबंधी समस्याओं से राहत दिलाता है।

पपीते के पत्तों का काढ़ा: पपीते के पत्तों का काढ़ा शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और दोषों को संतुलित करने में मदद करता है।

बनाने का तरीका: पपीते के पत्तों को सुखाकर उनका चूर्ण बना लें। एक चम्मच चूर्ण को दो कप पानी में तब तक उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए। इस काढ़े का नियमित सेवन शरीर के वात और कफ दोष संतुलित होता है।

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