कुण्डलिनीशक्ति जागरण की दिशा में अपने शिष्यों को आगे बढ़ाने के साथ ही उन्हें नशामुक्त, मांसाहारमुक्त, चरित्रवान्, चेतनावान्, पुरुषार्थी एवं परोपकारी बनाकर मानवता की सेवा, धर्मरक्षा तथा राष्ट्ररक्षा जैसे मानवीय कत्र्तव्यों का बोध कराने वाले ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज की अध्यात्मिकशक्ति का आकलन करना सहज नहीं है। ऋषिवर के ऊपर माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की इतनी कृपा है कि उनके दर्शनमात्र से समस्त दु:ख तिरोहित होकर जन्म-जन्म के पाप धुल जाते हैं।
महाशक्ति शंखनाद, ‘माँÓ की दिव्यचेतनात्मकशक्ति के आवाहन का शंखनाद है, जिसके प्रभाव से ही भारतीय सनातन संस्कृति की स्थापना करके कलिकाल के भयावह वातावरण को समाप्त किया जा सकता है। अत: इस दिव्य ऊर्जात्मक शिविर में ‘माँÓ की शक्ति को स्वयं में समाहित करने की क्षमता प्राप्त करने हेतु दिनांक 25-26 $फरवरी 2023 को परेड ग्राउण्ड, संगम, प्रयागराज, उत्तरप्रदेश में आयोजित शक्ति चेतना जनजागरण शिविर ‘महाशक्ति शंखनादÓ में पहुँचने का हरसंभव प्रयत्न करें।
संकल्प शक्ति। समाज को मानवजीवन के मुख्य लक्ष्य से अवगत कराने, सत्यधर्म के मार्ग पर बढ़ाने तथा अनीति-अन्याय-अधर्म के विरुद्ध संघर्ष के लिये आत्मशक्ति प्राप्त हो, इस हेतु ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के आशीर्वाद से भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के द्वारा हर वर्ष किसी न किसी प्रान्त में एक या दो शक्ति चेतना जनजागरण शिविरों का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष दिनांक 25-26 $फरवरी 2023 को परेड ग्राउण्ड, संगम, प्रयागराज (उ.प्र.) में सम्पन्न होने जा रहे शक्ति चेतना जनजागरण शिविर ‘महाशक्ति शंखनादÓ में लाखों शक्तिसाधकों के द्वारा किये जाने वाले शंखनाद की आगाज से आसुरीतत्त्वों के हृदय प्रकंपित हो उठेंगे। इस आयोजन में हमें ऋषिवर के चेतनात्मक चिन्तन व मार्गदर्शन प्राप्त होंगे तथा शिविर के द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में प्रात: 07:00 बजे इच्छुक नए भक्त गुरुदीक्षा प्राप्त करके नवजीवन का शुभारम्भ करेंगे। इतना ही नहीं, शिविर के प्रथम दिवस के प्रथम सत्र में प्रात: 07:00 बजे से 09:00 बजे तक शक्तिस्वरूपा बहन सिद्धाश्रमरत्न संध्या शुक्ला जी शिविरार्थियों को योग-ध्यान-साधना की विधा से अलंकृत करेंगी।
सद्गुरुदेव जी महाराज का चिन्तन है कि ”मन की गति विचित्र है, जो विचारों को मूलबिन्दु पर ठहरने ही नहीं देती। अतएव अपने विचारों को धाराप्रवाह मत बहने दें, बल्कि कुछ देर ठहरकर विचारों को विवेक की कसौटी पर कसो कि कहीं हमारे विचार $गलत दिशा में तो नहीं जा रहे हैं और यदि ऐसा है, तो उन पर लगाम कसें और जो व्यक्ति ऐसा करता है, उसे जीवन में कभी भी असफलता का मुँह नहीं देखना पड़ता। कुविचारों के कारण ही मनुष्य अनीति-अन्याय-अधर्म एवं भोगलिप्सा जैसे निकृष्ट आचरणों से निकल नहीं पा रहा है और यही कारण है कि समय-समय पर उसे दारुण कष्टों का सामना करना पड़ता है। इसलिए यदि दु:ख, कष्ट, निरीहता से बचना है, तो अपने विचारों में पवित्रता लाकर अध्यात्मिक राह पर चलते हुए मानवीय कत्र्तव्यों के प्रति सजग रहें।
ऋषिवर कहते हैं कि ”जब तक आपका सम्पूर्ण स्वभाव अध्यात्मिक आदर्श में नहीं बदल जाता, तब तक अपने विचारों को सही दिशा देते रहो। समय बहुत तेजी के साथ भाग रहा है, इसलिये अपने जीवन की दिशाधारा को अच्छाइयों की ओर मोड़ दो तथा मानवता की सेवा, धर्मरक्षा व राष्ट्ररक्षा के लिये स्वयं को समर्पित कर दो। क्योंकि, इस जगत् की सृष्टा माता जगदम्बे यही चाहती हैं कि उनकी बनाई सृष्टि और सुन्दर बने तथा इसके लिए ही ‘माँÓ ने तुम्हें मानवरूप में जन्म दिया है।
तो आइये, माता आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा और ऋषिवर सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज की इच्छा के अनुरूप हम-आप-सब मिलकर सम्पूर्ण समाज को नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् बनाकर, मानवता की सेवा, धर्मरक्षा एवं राष्ट्ररक्षा जैसे मानवीय कत्र्तव्यों को पूर्ण करने की दिशा में आगे बढ़ें।





























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