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	<title>dharm &#8211; संकल्प शक्ति</title>
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	<description>राष्ट्रीय साप्ताहिक समाचार पत्र</description>
	<lastBuildDate>Mon, 13 Jul 2026 04:15:40 +0000</lastBuildDate>
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	<title>dharm &#8211; संकल्प शक्ति</title>
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		<title>मैहर वाली शारदा माता मंदिर का कपाट बंद होने पर भी गूंजती हैं घंटियां और अदृश्य रूप से होती है पूजा!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Jul 2026 04:15:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म अध्यात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मध्यप्रदेश के ज़िला मैहर में स्थित माँ शारदा का मंदिर अपने अलौकिक चमत्कारों और रहस्यमयी आस्था के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि रात में मंदिर के कपाट बंद होने के बाद भी यहां घंटियां गूंजती हैं और अदृश्य रूप से पूजा होती है तथा माता का दिव्य शृंगार होजाता है। भारत [&#8230;]</p>
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<p class="wp-block-paragraph">मध्यप्रदेश के ज़िला मैहर में स्थित माँ शारदा का मंदिर अपने अलौकिक चमत्कारों और रहस्यमयी आस्था के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि रात में मंदिर के कपाट बंद होने के बाद भी यहां घंटियां गूंजती हैं और अदृश्य रूप से पूजा होती है तथा माता का दिव्य शृंगार होजाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारत भूमि रहस्यों और चमत्कारों से भरी पड़ी है। देश में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनके आगे आज का आधुनिक विज्ञान और तकनीक भी नतमस्तक होजाती है। ऐसा ही एक परम पवित्र और रहस्यमयी धाम है मध्यप्रदेश के त्रिकूट पर्वत पर स्थित माँ शारदा का मैहर मंदिर। समुद्र तल से करीब 600 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह ऐतिहासिक मंदिर माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि यहां माता सती का हार गिरा था, जिसके कारण इस जगह का नाम &#8216;माई का हार&#8217; यानी &#8216;मैहर&#8217; पड़ा। लेकिन इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका वह रहस्य है, जो सदियों से अनसुलझा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>रात 9 बजे बंद होजाते हैं कपाट</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">आम दिनों में मैहर देवी मंदिर के कपाट रात 9:00 बजे भक्तों के लिए पूरी तरह बंद कर दिए जाते हैं। नियम के मुताबिक, मंदिर के पुजारी गर्भगृह की पूरी सफाई करते हैं, माता के वस्त्र-आभूषण व्यवस्थित करते हैं और मुख्य कपाट पर भारी ताला लगा देते हैं। इसके बाद मंदिर परिसर और पूरी पहाड़ी को खाली करवा दिया जाता है। रात के सन्नाटे में यहां किसी भी इंसान को रुकने की अनुमति नहीं होती।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>यहीं से होती है रहस्य की शुरुआत</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp; &nbsp;स्थानीय निवासियों और पीढ़ियों से जुड़े पुजारियों का दावा है कि कपाट बंद होने के बाद, रात के गहरे सन्नाटे में अक्सर मंदिर के भीतर से घंटियां बजने और मंत्रोच्चार की धीमी आवाजें सुनाई देती है और सबसे हैरान करने वाला दृश्य सुबह ब्रह्ममुहूर्त में देखने को मिलता है। जब मंदिर के सरकारी पुजारी सुबह-सुबह भारी सुरक्षा और नियमों के साथ गर्भगृह का ताला खोलते हैं, तो वे दंग रह जाते हैं। माता शारदा के चरणों में ताजे सुगंधित फूल (अक्सर चमेली के) चढ़े हुए मिलते हैं आ ैर माता का पहले से ही पूजन और शृंगार संपन्न हो चुका होता है। गर्भगृह में ताजे चंदन की खुशबू महक रही होती है और जल का पात्र बदला हुआ मिलता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आख़िर कौन करता है रहस्यमयी पूजा?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">अब सवाल उठता है कि जब चारों तरफ कड़ा पहरा था और ताले बंद थे, तो बंद कपाट के पीछे आकर यह पूजा कौन कर गया? कौन करता है यह रहस्यमयी पूजा? पौराणिक कथाओं और स्थानीय लोक मान्यताओं के अनुसार, यह दिव्य पूजा कोई इंसान नहीं, बल्कि 12वीं सदी के महान वीर योद्धा &#8216;आल्हा&#8217; और &#8216;ऊदल&#8217; करते हैं। आल्हा और ऊदल बुंदेलखंड के चंदेल राजा परमाल के सेनापति थे और माता शारदा के परम भक्त थे। इतिहास कहता है कि इन दोनों भाइयों ने ही घने जंगलों के बीच इस ऊंचे पर्वत पर माता के इस मंदिर की खोज की थी। उन्होंने ही सबसे पहले देवी को &#8216;शारदा माई&#8217; कहकर पुकारा था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कहा जाता है कि आल्हा ने यहां 12 वर्षों तक कठिन तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर मां शारदा ने उन्हें &#8216;अमरत्व&#8217; (कभी न मरने) का वरदान दिया था। मान्यता है कि अपने उसी वरदान और अटूट भक्ति के कारण वीर आल्हा आज भी अदृश्य रूप से जीवित हैं और हर रात सबसे पहले आकर अपनी &#8216;शारदा माई&#8217; की आरती और पूजा करते हैं। मंदिर के पीछे पहाड़ी के नीचे आज भी &#8216;आल्हा तालाब&#8217; और उनका अखाड़ा मौजूद है, जो इस कहानी को बल देता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>विज्ञान के पास नहीं है कोई जवाब</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">कई बार वैज्ञानिकों, तर्कवादियों और खोजी टीमों ने इस रहस्य के पीछे की सच्चाई जानने की कोशिश की। रात में कैमरे लगाने और कड़ी निगरानी रखने के प्रयास भी हुए, लेकिन इस अलौकिक घटना के पीछे का असली सच आज तक कोई नहीं जान पाया। भक्तों के लिए यह कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि साक्षात परमसत्ता की उपस्थिति का सबसे बड़ा प्रमाण है। यही कारण है कि हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस दिव्य चमत्कार को महसूस करने और माता का आशीर्वाद लेने 1063 से अधिक सीढ़ियां चढ़कर या रोप-वे के जरिए त्रिकूट पर्वत पर पहुंचते हैं।</p>



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		<title>दमोह में सम्पन्न हुआ मासिक महाआरतीक्रम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Jul 2025 08:00:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>दमोह। भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में द्वितीय रविवार को कृषि उपजमंडी, ज़िला-दमोह के प्रांगण में मासिक महाआरतीक्रम सम्पन्न किया गया। कार्यक्रम के शुभारम्भ में उपस्थित भक्तों ने सामूहिक रूप से ‘माँ’-गुरुवर के जयकारे लगाए, पश्चात् साधनाक्रम पूर्ण करके सभी ने दिव्य आरती का लाभ प्राप्त किया। आरतीक्रम [&#8230;]</p>
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<p class="wp-block-paragraph">दमोह। भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में द्वितीय रविवार को कृषि उपजमंडी, ज़िला-दमोह के प्रांगण में मासिक महाआरतीक्रम सम्पन्न किया गया। कार्यक्रम के शुभारम्भ में उपस्थित भक्तों ने सामूहिक रूप से ‘माँ’-गुरुवर के जयकारे लगाए, पश्चात् साधनाक्रम पूर्ण करके सभी ने दिव्य आरती का लाभ प्राप्त किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आरतीक्रम सम्पन्न होने के उपरान्त, सभी भक्तों ने क्रमवार ‘माँ’-गुरुवर की दिव्यछवि के समक्ष नतमस्तक हुए और उन्होंने आजीवन नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् जीवन जीने का संकल्प लिया।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">अंत में शक्तिजल और प्रसाद का वितरण किया गया। कार्यक्रम का संचालन राजेश रैकवार जी ने किया।</p>
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		<title>अज्ञानान्धकार को दूर करने का पावन पर्व है गुरुपूर्णिमा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Jul 2025 04:25:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म अध्यात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>संकल्प शक्ति। हर साल की तरह इस साल भी अध्यात्मिकस्थली पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम में ऋषिवर सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के शिष्यों के द्वारा उल्लास-उमंग से गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया जायेगा। हज़ारों की संख्या में सिद्धाश्रम पहुँचे परम पूज्य  गुरुवरश्री के शिष्य, प्रात:काल एवं सायंकाल मूलध्वज साधना मंदिर और श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ मंदिर में [&#8230;]</p>
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<p class="wp-block-paragraph">संकल्प शक्ति। हर साल की तरह इस साल भी अध्यात्मिकस्थली पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम में ऋषिवर सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के शिष्यों के द्वारा उल्लास-उमंग से गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया जायेगा। हज़ारों की संख्या में सिद्धाश्रम पहुँचे परम पूज्य  गुरुवरश्री के शिष्य, प्रात:काल एवं सायंकाल मूलध्वज साधना मंदिर और श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ मंदिर में सम्पन्न होने वाली आरतीक्रम में सम्मिलित होंगे। तत्पश्चात्  अपने आराध्य सद्गुुरुदेव जी महाराज के श्री चरणों पर नतमस्तक होकर अपने जीवन को कृतार्थ करेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमारे सनातन संस्कृति में आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। कहते हैं कि&nbsp; गुरु की कृपा हो जाए, तो इष्ट से साक्षात्कार हो सकता है।&nbsp; गुरु पूर्णिमा सद्गुरु को समर्पित परम्परा है। इस दिन गुरुपूजन का विधान है। शिष्यगण अपने गुरु&nbsp; के श्रीचरणों पर नतमस्तक होकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं या उनके चरण पादुकाओं का पूजन करते हैं और इससे साधकों को भक्ति, ज्ञान और आत्मशक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है। शास्त्रों में गु का अर्थ बताया गया है- अंधकार या मूल अज्ञान और रु का का अर्थ बताया गया है- उसका निरोधक। गुरु को गुरु इसलिए कहा जाता है कि वह शिष्यों के अज्ञानान्धकार को दूर करते हैं अर्थात् अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाते हैं।&nbsp; यह दिन आदिगुरु महर्षि वेद व्यास जी के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। इस वर्ष गुरुपूर्णिमा पर्व दिनांक 10 जुलाई, दिन-गुरुवार को है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>जो आत्मज्ञानी हैं, वे ही सद्गुरु हैं</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">अज्ञानान्धकार को मिटाकर अपने शिष्यों के अन्त:करण में जो ज्ञान का प्रकाश भर दे, वहीं सद्गुरु है और वर्तमान समय में इस भूतल पर ऐसे सद्गुरु एक ही हैं और वे हैं- ऋषिवर श्री शक्तिपुत्र जी महाराज, जिनका इस पावनभूमि में मानवता के कल्याण के लिए, शिष्यों-भक्तों के हृदय से अज्ञानान्धकार हटाकर अन्तर्ज्योति प्रकाशित करने के लिए अवतरण हुआ है। केवल धर्मग्रन्थों को रट लेने वाले व बीजमन्त्र प्रदाताओं को हम श्रेष्ठ गुरु नहीं कह सकते। श्रेष्ठ गुरु वे ही हो सकते हैं, जिनकी कुण्डलिनी चेतना जाग्रत् हो, जो आत्मज्ञानी हो। इसीलिए कहा गया है कि पानी पियो छान के और गुरु बनाओ जान के।&nbsp;</p>
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		<title>27 जून से शुरू होगी पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Jun 2025 14:00:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[adhyatm]]></category>
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		<category><![CDATA[jagannath puri]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पुरी की जगन्नाथ यात्रा भारत की सबसे पवित्र धार्मिक यात्राओं में से एक है, जो हर साल आषाढ़ महीने के शुक्लपक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होकर दशमी तिथि तक चलती है। इस बार यह यात्रा 27 जून से शुरू होकर 05 जुलाई को समाप्त होगी। लोगों का मानना है कि इस यात्रा में शामिल [&#8230;]</p>
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<p class="wp-block-paragraph">पुरी की जगन्नाथ यात्रा भारत की सबसे पवित्र धार्मिक यात्राओं में से एक है, जो हर साल आषाढ़ महीने के शुक्लपक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होकर दशमी तिथि तक चलती है। इस बार यह यात्रा 27 जून से शुरू होकर 05 जुलाई को समाप्त होगी। लोगों का मानना है कि इस यात्रा में शामिल होना और भगवान् जगन्नाथ के दर्शन करने से जीवन के सभी दु:ख और परेशानियां दूर होजाती हैं और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;मान्यता है कि भगवान् जगन्नाथ अपनी इस यात्रा पर निकलने से पहले अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ 14 दिनों का एकांतवास करते हैं। इसके बाद शुक्लपक्ष की द्वितीय तिथि को वे भक्तों को दर्शन देते हैं और रथ यात्रा की शुरूआत होती है। यह परंपरा भक्तों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानी जाती है, जो अध्यात्मिक शांति और सुख-समृद्धि का संदेश देती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पौराणिक कथा</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">जगन्नाथ रथ यात्रा के पीछे एक पौराणिक कथा है, जो पद्म पुराण में वर्णित है। कहा जाता है कि आषाढ़ महीने में भगवान् जगन्नाथ की बहन सुभद्रा ने उनसे&nbsp; शहर देखने की इच्छा जताई थी। तब भगवान् जगन्नाथ ने अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के लिए तीन रथ बनवाए। तीनों भाई-बहन उन रथों पर बैठकर नगर भ्रमण पर निकले और अपनी मौसी के घर, जिसे गुंडिचा मंदिर कहा जाता है, वहां सात दिन तक रहे। इस घटना के बाद से ही हर साल यह रथ यात्रा निकाली जाने लगी। इस रथ यात्रा में सबसे आगे भगवान् बलराम का रथ होता है, बीच में बहन सुभद्रा का रथ और सबसे पीछे भगवान् जगन्नाथ का रथ होता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;यात्रा के दौरान भक्तजन भगवान् की रथों को अपने हाथों से खींचते हैं, जिससे यह विश्वास जुड़ा है कि ऐसा करने से उनके सभी पाप धुल जाते हैं और उन्हें जीवन में सुख-शांति प्राप्त होती है। इसलिए यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास, भक्ति और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी है।</p>
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		<title>गुप्त नवरात्र 26 जून से प्रारम्भ, समापन तिथि 04 जुलाई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Jun 2025 13:30:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[adhyatm]]></category>
		<category><![CDATA[dharm]]></category>
		<category><![CDATA[durga puja]]></category>
		<category><![CDATA[gupt navratri]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आषाढ़ मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन से गुप्त नवरात्र की शुरूआत होती है। चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र में मातेश्वरी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। वहीं, गुप्त नवरात्र में देवी की दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। इस दौरान तांत्रिक, अघोरी तंत्र-मंत्र और सिद्धि प्राप्त करते [&#8230;]</p>
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<p class="wp-block-paragraph">आषाढ़ मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन से गुप्त नवरात्र की शुरूआत होती है। चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र में मातेश्वरी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। वहीं, गुप्त नवरात्र में देवी की दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। इस दौरान तांत्रिक, अघोरी तंत्र-मंत्र और सिद्धि प्राप्त करते हैं। ऐसे में गुप्त नवरात्र का महत्त्व बहुत विशेष होता है। इस दौरान देवी की साधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती है।&nbsp;&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">पूरे वर्ष में चार नवरात्र आते हैं, जिनमें से दो गुप्त नवरात्र होती है। हिंदूधर्म में इन नौ दिनों का बहुत खास महत्त्व होता है। एक गुप्त नवरात्र माघ में भी आती है। मान्यता है कि ये नवरात्र सिद्धि और साधना के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण होती हैं। साथ ही, तंत्र-मंत्र के साधक&nbsp; इन दिनों में विशेष रूप से साधना रखते हैं। गुप्त नवरात्र लोगों के बीच ज़्यादा प्रचलित नहीं है, जिसके पीछे का कारण यही है कि इसमें तंत्र-मंत्र के साधक ज़्यादा साधना रखते हैं। माना जाता है कि इस दौरान मां दुर्गा और उनकी 10 महाविद्याओं की पूजा करने से व्यक्ति को विशेष फल की प्राप्ति हो सकती है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस साल आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्र 26 जून से शुरू है और इसका समापन 04 जुलाई को होगा। यानी इस बार गुप्त नवरात्र पूरे नौ दिनों तक रहेगी। गुप्त नवरात्र के लिए घट स्थापना का शुभ मुहूर्त ध्रुव योग और आर्द्रा नक्षत्र में रहेगा। वहीं, 03 जुलाई के दिन दुर्गा अष्टमी मनाई जाएगी और नवमी तिथि का समापन शाम के समय 04 बजकर 32 मिनट पर होगा। प्रतिपदा तिथि की शुरूआत- 26 जून, गुरुवार को सूर्योदय के पूर्व से ही&nbsp; शुरू हो जाएगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>दस महाविद्याओं की साधना</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्र में सामान्य लोग माँ दुर्गा की विधि-विधान से पूजा अर्चना करते हैं। इसके अलावा, तांत्रिक, अघोरी तंत्र-मंत्र की सिद्धि प्राप्त करते हैं। ये सभी देवी की दस महाविद्याओं की साधना करते हैं, जिन्हें बहुत शक्तिशाली माना जाता है। मान्यता है कि जिस व्यक्ति पर देवी की कृपा होती है, उसे किसी भी संकट का सामना नहीं करना पड़ता है। साथ ही, ऐसे लोगों के लिए दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं रहता है। देवी की दस महाविद्याएं इस प्रकार हैं- माता धूमावती देवी, माता काली देवी, माता त्रिपुरा देवी, माता तारा देवी, माता षोडशी देवी, माता छिन्नमस्ता देवी, भुवनेश्वरी देवी, माता बगलामुखी देवी, माता कमला देवी और माता मातंगी देवी।</p>
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		<title>महोबा में सम्पन्न हुआ मासिक महाआरतीक्रम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Jul 2024 05:01:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[adhyatm]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महोबा। भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में प्रत्येक माह की भांति इस माह भी तीसरे रविवार को महाआरतीक्रम सम्पन्न किया गया।  शुभारंभ में &#8216;माँ-गुरुवर के जैकारे कु.गोमती प्रजापति जी और कु.अंजली प्रजापति जी ने लगवाए।   समापन बेला पर श्रीमती संगीता कुशवाहा जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि [&#8230;]</p>
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<p class="wp-block-paragraph">महोबा। भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में प्रत्येक माह की भांति इस माह भी तीसरे रविवार को महाआरतीक्रम सम्पन्न किया गया।  शुभारंभ में &#8216;माँ-गुरुवर के जैकारे कु.गोमती प्रजापति जी और कु.अंजली प्रजापति जी ने लगवाए।  </p>



<p class="wp-block-paragraph">समापन बेला पर श्रीमती संगीता कुशवाहा जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि &#8216;हमें यह तन सौभाग्य से मिला है, तो इसे जनकल्याण में लगाना है और परम पूज्य गुरुवरश्री ने जो साधनाक्रम दिए हैं, नित्यप्रति सुबह-शाम पूर्ण करना है। संगठन के जि़लाध्यक्ष अनुपम त्रिपाठी जी ने कहा कि &#8216;हम गुरुवरश्री के निर्देशन में इस जीवन की यात्रा को पूर्ण कर रहे हैं। हम ऐसे ऋषि के शिष्य हैं, जिनके समकक्ष इस भूतल पर दूसरा कोई गुरु नहीं है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">उद्बोधनक्रम के बाद शक्तिजल और प्रसाद का वितरण किया गया। कार्यक्रम का संचालन मातादीन सेन जी ने किया।&nbsp;&nbsp;</p>
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		<title>6 साल बाद खुला जगन्नाथ मंदिर का खजाना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Jul 2024 04:57:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[dharm]]></category>
		<category><![CDATA[hindu]]></category>
		<category><![CDATA[Jagannath mandir]]></category>
		<category><![CDATA[sanatan]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पुरी। ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर का खजाना गत दिवस 46 साल बाद खोला गया। भंडार गृह में सरकार के प्रतिनिधि, एएसआई के अधिकारी, श्री गजपति महाराज के प्रतिनिधि सहित 11 लोग उपस्थित थे। सरकार रत्न भंडार में मौजूद कीमती सामानों की लिस्टिंग करेगी, जिसमें उनके वजन और निर्माण जैसे डिटेल होंगे। पुरी मंदिर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">पुरी। ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर का खजाना गत दिवस 46 साल बाद खोला गया। भंडार गृह में सरकार के प्रतिनिधि, एएसआई के अधिकारी, श्री गजपति महाराज के प्रतिनिधि सहित 11 लोग उपस्थित थे। सरकार रत्न भंडार में मौजूद कीमती सामानों की लिस्टिंग करेगी, जिसमें उनके वजन और निर्माण जैसे डिटेल होंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पुरी मंदिर के मुख्य प्रशासक अरविंद पाधी ने बताया कि आउटर रत्न भंडार का सामान लकड़ी के 06 बक्सों में शिफ्ट करके सील कर दिया गया है, लेकिन इनर रत्न भंडार का सामान शिफ्ट नहीं किया जा सका। यह काम कुछ दिन बाद होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गौरतलब है कि मंदिर का खजाना आख़्िारी बार 1978 में खोला गया था। तब खजाने में 128 किलो सोना और 222 किलो चांदी होने की बात सामने आई थी। 2018 में हाईकोर्ट के निर्देश पर रत्न भंडार को खोलने की कोशिश हुई, लेकिन असली चाबियां नहीं मिल सकीं थीं। खजाने का यह मुद्दा भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनावी मेनिफेस्टो में भी रखा था, जिसे सरकार बनते ही पूरा किया जा रहा है।</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://sankalpshakti.in/6-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%97%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf/">6 साल बाद खुला जगन्नाथ मंदिर का खजाना</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://sankalpshakti.in">संकल्प शक्ति</a>.</p>
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