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	<title>Samsamyik &#8211; संकल्प शक्ति</title>
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	<description>राष्ट्रीय साप्ताहिक समाचार पत्र</description>
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	<title>Samsamyik &#8211; संकल्प शक्ति</title>
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		<title>राष्ट्र निर्माण और वैश्विक बदलाव की महाशक्ति हैं युवा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:51:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>संकल्प शक्ति। हर वर्ष 12 अगस्त को दुनिया भर में ‘अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस’ मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा साल 1999 में इस दिन को मनाने की घोषणा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक समाज के विकास में युवाओं के योगदान को रेखांकित करना और उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर दुनिया का [&#8230;]</p>
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<p class="wp-block-paragraph">संकल्प शक्ति। हर वर्ष 12 अगस्त को दुनिया भर में ‘अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस’ मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा साल 1999 में इस दिन को मनाने की घोषणा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक समाज के विकास में युवाओं के योगदान को रेखांकित करना और उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर दुनिया का ध्यान आकर्षित करना है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">आज का युवा केवल कल का भविष्य नहीं, बल्कि आज का सबसे सक्रिय नीति-निर्माता और बदलाव का संवाहक है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">वैश्विक पटल पर भारत की स्थिति इस मामले में सबसे अनूठी है। वर्तमान में भारत दुनिया का सबसे युवा देश है, जहां की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और यह&nbsp; ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ भारत को एक ऐसी वैश्विक महाशक्ति बनाता है, जो आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक मोर्चे पर दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता रखती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">डिजिटल क्रांति और स्टार्टअप संस्कृति के अगुवा आज का युवा पारंपरिक नौकरियों के दायरे से बाहर निकलकर जोखिम उठाने और नए प्रयोग करने से नहीं डरता।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>स्टार्टअप इकोसिस्टम:</strong> भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है, और इसके पीछे देश के युवा उद्यमियों की सोच और कड़ी मेहनत है। फिनटेक, एडुटेक और एआई के क्षेत्र में युवा नित नए कीर्तिमान रच रहे हैं। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तकनीकी नवाचार: </strong>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कोडिंग, रोबोटिक्स और डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों में युवाओं की पकड़ ने देश को डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनाया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>  समकालीन चुनौतियाँ:</strong> आज जहाँ एक ओर युवाओं के पास असीम अवसर हैं, वहीं दूसरी ओर उनके सामने कई गंभीर चुनौतियाँ भी हैं, जिन पर ध्यान देना आवश्यक है-</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>  रोजगार और कौशल विकास:</strong> तेजी से बदलती तकनीक के इस दौर में पारंपरिक डिग्रियां नाकाफी साबित हो रही हैं। युवाओं को कौशल संवर्धन करना और उद्योग जगत् की मांग के अनुरूप तैयार करना आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मानसिक स्वास्थ्य: </strong>सोशल मीडिया का अत्यधिक प्रभाव, करियर का दबाव और आधुनिक जीवनशैली के कारण युवाओं में अवसाद (डिप्रेशन) और एंग्जायटी की समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं। इस पर खुलकर बात करना और उन्हें संबल देना बेहद ज़रूरी है। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण: </strong>आज का युवा पर्यावरण के प्रति बेहद संवेदनशील है। सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सतत विकास) और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए अनिवार्य है। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;किसी भी देश की प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि उसके युवाओं की ऊर्जा को किस दिशा में मोड़ा जा रहा है। युवाओं को केवल राजनीतिक मोहरे या उपभोक्ता के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के मुख्य स्तंभ के रूप में देखा जाना चाहिए। नीतियों के निर्धारण में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने, उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित माहौल देना किसी भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के इस अवसर पर संकल्प लेने का समय है कि हम युवाओं के विचारों को मंच दें, उनके नवाचारों को सम्मान दें और उन्हें एक ऐसा समाज सौंपें जहाँ वे अपने सपनों को बिना किसी डर के उड़ान दे सकें।</p>



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		<title>मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं में मिलता है ग्रामीण जीवन का जीवंत चित्रण</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 02:29:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समसामयिक]]></category>
		<category><![CDATA[31 july]]></category>
		<category><![CDATA[death anniversary]]></category>
		<category><![CDATA[munshi premchand]]></category>
		<category><![CDATA[punya tithi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हिंदी और उर्दू साहित्य के अनमोल रत्न, &#8216;उपन्यास सम्राट&#8217; और &#8216;कथा सम्राट&#8217; कहे जाने वाले मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती 31 जुलाई को है। वाराणसी के पास लमही गांव में जन्मे धनपत राय (प्रेमचंद) ने अपनी जादुई कलम से आम आदमी, किसान, मजदूर, महिलाओं और समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की पीड़ा [&#8230;]</p>
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<p class="wp-block-paragraph">हिंदी और उर्दू साहित्य के अनमोल रत्न, &#8216;उपन्यास सम्राट&#8217; और &#8216;कथा सम्राट&#8217; कहे जाने वाले मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती 31 जुलाई को है। वाराणसी के पास लमही गांव में जन्मे धनपत राय (प्रेमचंद) ने अपनी जादुई कलम से आम आदमी, किसान, मजदूर, महिलाओं और समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की पीड़ा को जो जुबान दी, उसकी गूंज आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रेमचंद से पहले का हिंदी साहित्य राजा-रानियों, परियों, जादुई तिलिस्म और काल्पनिक ऐश्वर्य की कहानियों में सिमटा हुआ था। प्रेमचंद जी ने इस परंपरा को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने साहित्य को कल्पना के लोक से निकालकर भारत के गांवों और ग़रीब किसानों की झोपड़ियों तक पहुंचाया। उनकी रचनाओं में ग्रामीण जीवन का जो जीवंत और यथार्थवादी चित्रण मिलता है, वह अन्यत्र दुर्लभ है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सामाजिक कुरीतियों पर करारी चोट:</strong> उन्होंने जातिवाद, छुआछूत, दहेज प्रथा, अनमेल विवाह, कर्ज के जाल में फंसे किसानों की लाचारी और जमींदारों व साहूकारों के शोषण को अपनी कहानियों और उपन्यासों का मुख्य विषय बनाया। अमर पात्रों का संसार: प्रेमचंद जी की कलम ने हिंदी साहित्य को ऐसे अमर पात्र दिए हैं जो आज भी हमारे समाज के किसी-न-किसी कोने में जीवित नज़र आते हैं। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong> होरी और धनिया (गोदान):</strong> भारतीय किसान की लाचारी, मर्यादा और जीवन भर के संघर्ष की सबसे जीवंत और दु:खद दास्तान। हामिद (ईदगाह): मात्र चार-पाँच साल का एक छोटा बच्चा, जो अपनी खुशियों को मारकर अपनी दादी के लिए चिमटा खरीदता है। यह कहानी बाल मनोविज्ञान और संवेदनशीलता की पराकाष्ठा है। हल्कू (पूस की रात): ठंड से ठिठुरता एक ग़रीब किसान, जो फसल नष्ट होने पर भी कर्ज के जाल से मुक्ति की राहत महसूस करता है। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>प्रेमचंद के विचार: </strong>आज हम जिस आधुनिक और डिजिटल युग में जी रहे हैं, वहां भी प्रेमचंद जी के विचार और उनकी रचनाएं प्रासंगिक हैं। चाहे किसानों की समस्याएं हों, महिलाओं के अधिकार हों या फिर समाज में बढ़ती आर्थिक असमानता—प्रेमचंद जी इन सब पर एक सदी पहले ही विस्तार से लिख दिया था। उन्होंने केवल कहानियां नहीं लिखीं, बल्कि समाज को आईना दिखाया और सुधरने का मार्ग भी सुझाया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सच्ची श्रद्धांजलि: </strong> 31 जुलाई को उनकी जयंती मनाना केवल एक रस्म नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके लिखे &#8216;कफन&#8217;, &#8216;गबन&#8217; और &#8216;रंगभूमि&#8217; जैसे साहित्यों को पढ़कर समाज में समानता और संवेदनशीलता की भावना जगाना ही इस महान लेखक को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।</p>
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		<title>समय से आगे की सोच रखते थे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Jul 2025 07:30:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समसामयिक]]></category>
		<category><![CDATA[current affair]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[Samsamyik]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भारतीय राजनीति और समाज में उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण और समय से आगे की सोच के लिए जाना जाता है। उनके जीवन और कार्यों ने दिखाया कि वे न केवल अपने समय के मुद्दों को समझते थे, बल्कि भविष्य की चुनौतियों और अवसरों का भी गहरा ज्ञान रखते थे। देश और [&#8230;]</p>
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<p class="wp-block-paragraph">डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भारतीय राजनीति और समाज में उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण और समय से आगे की सोच के लिए जाना जाता है। उनके जीवन और कार्यों ने दिखाया कि वे न केवल अपने समय के मुद्दों को समझते थे, बल्कि भविष्य की चुनौतियों और अवसरों का भी गहरा ज्ञान रखते थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">देश और समाज के लिए तुष्टिकरण की राजनीति कितना नुक़सान पहुंचा सकती है, इसको हमारे कई दार्शनिक समाजसेवियों ने दशकों पहले समझ लिया था। एक देश और एक विधान का मंत्र देने वाले डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी ने इसके लिए मिसाल पेश की। स्वतंत्र भारत की पहली सरकार ने तुष्टिकरण की नीति पर चलना शुरू किया, तो डॉ. मुखर्जी ने कैबिनेट से इस्तीफा देकर भारतीय जनसंघ की स्थापना की। आज केंद्र में भाजपा की लगातार तीसरी बार सरकार बनी है और माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के हाथों में देश की बागडोर है। इसके पीछे डॉ मुखर्जी की ही नीति और सोच है। 06 जुलाई को उनका बलिदान दिवस है।&nbsp;&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">हम सभी को मालूम है कि आज़ादी मिलने के बाद बनी पहली केंद्र सरकार से डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी के मतभेद देखने को मिले थे और जब तत्कालीन नेहरू सरकार ने भारत के संविधान में जबरन अनुच्छेद 370 जोड़कर देश की संप्रभुता और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास किया था, तब अखंड भारत के समर्थक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कांग्रेस की तुष्टीकरण नीति का विरोध किया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;गौरतलब है कि&nbsp; जवाहरलाल नेहरू ने डॉ. मुखर्जी को अंतरिम सरकार में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में शामिल किया। नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली के बीच हुए समझौते के पश्चात 06 अप्रैल 1950 को उन्होंने मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर-संघचालक गुरु गोलवलकर जी से परामर्श लेकर श्री मुखर्जी ने 21 अक्टूबर 1951 को राष्ट्रीय जनसंघ की स्थापना की।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">डॉ. मुखर्जी भारत की अखंडता और कश्मीर के विलय के दृढ़ समर्थक थे। उन्होंने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को भारत के बाल्कनीकरण की संज्ञा दी थी। अनुच्छेद 370 के राष्ट्रघातक प्रावधानों को हटाने के लिए भारतीय जनसंघ ने हिन्दू महासभा और रामराज्य परिषद के साथ सत्याग्रह आरंभ किया था। डॉ. मुखर्जी 11 मई 1953 को कुख्यात परमिट सिस्टम का उल्लंघन करके कश्मीर में प्रवेश करते हुए गिरफ़्तार कर लिए गए। गिरफ़्तारी के दौरान ही विषम परिस्थितियों में 23 जून 1953 को उनका स्वर्गवास हो गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन और कार्य एक अद्वितीय उदाहरण है, जिसमें उन्होंने शिक्षा, राजनीति और समाज सुधार के विभिन्न मोर्चों पर उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका जन्म 06 जुलाई 1901 को एक प्रतिष्ठित बंगाली भद्रलोक परिवार में हुआ था, जो उस समय अपनी बौद्धिकता और सांस्कृतिक योगदान के लिए विख्यात था।</p>
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		<title>अषाढ़ शुक्ल सप्तमी को ऐसी नदी का जन्मदिन है, जिसके स्मरण मात्र से पुण्य का फल प्राप्त होता है</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Jul 2025 05:24:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समसामयिक]]></category>
		<category><![CDATA[Nadi]]></category>
		<category><![CDATA[Samsamyik]]></category>
		<category><![CDATA[Tapti Rever]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>बुरहानपुर। आषाढ़ शुक्ल सप्तमी को जन्मी ताप्ती नदी का वेद और पुराणों में विशेष उल्लेख है। ताप्ती को सूर्य की बेटी माना जाता है और इसके जल में पूजन, दीपदान, तर्प, पिडदान का विशेष महत्त्व है। ताप्ती तट पर देवऋषि नारद, शांडिल्य, चांगदेव, मार्कण्डेय, उद्धालक, गौतम, ईवासा के साथ कई ऋषियों ने तप किया।  ताप्ती [&#8230;]</p>
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<p class="wp-block-paragraph">बुरहानपुर। आषाढ़ शुक्ल सप्तमी को जन्मी ताप्ती नदी का वेद और पुराणों में विशेष उल्लेख है। ताप्ती को सूर्य की बेटी माना जाता है और इसके जल में पूजन, दीपदान, तर्प, पिडदान का विशेष महत्त्व है। ताप्ती तट पर देवऋषि नारद, शांडिल्य, चांगदेव, मार्कण्डेय, उद्धालक, गौतम, ईवासा के साथ कई ऋषियों ने तप किया।  ताप्ती देश की प्रमुख पवित्र नदियों में से एक है। पुरातन काल में नदी तटों को ही मनुष्य ने निवास के लिए उपयुक्त जाना और नदी तटों पर ही सभ्यता, संस्कृति और नगरों का निर्माण हुआ। इसलिए ब्रघ्नपुर (बुरहानपुर का पूर्व नाम) ताप्ती तट पर हज़ारों साल पूर्व से बसा है। ताप्ती को तापी, तापनाशनी और सूर्य तनया सहित अन्य नामों से जाना जाता है। इसका अर्थ ताप्ती त्रिविध ताप को शांत करने वाली है। गंगाजी में चिरकाल तक स्नान करने से, नर्मदा के दर्शन करने और सरस्वती के संगम के जल का पान करने से जो फल प्राप्त होता है, वह मां ताप्ती के केवल स्मरण मात्र से ही प्राप्त हो जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;गौरतलब है कि ताप्ती नदी मुलताई से 193 किमी तक बहकर बुरहानपुर पहुंचती है। ताप्ती का जल जीवित व मृतक दोनों के लिए वरदान है। ताप्ती का जल पवित्र और चर्म रोग मिटाने वाला है। कोढ़ का इलाज करने का भी गुण इस जल में है। नारदजी का कोढ़ग्रस्त शरीर और राजा भोसले के वंशज का रोगग्रस्त शरीर ताप्ती के स्नान करने से ही स्वस्थ हुआ। यही कारण है कि ताप्ती में विसर्जित अस्थियां शीघ्र गल जाती हैं। ताप्ती ने अपने पिता सूर्य का सदैव मान सम्मान बढ़ाया।&nbsp;&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"> <strong>यह है ताप्ती का मार्ग</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">बुरहानपुर ज़िले में ताप्ती नदी देड़तलाई, तुकईथड़, पलासुर, सीवल, नावथा, लिंगा, नागझिरी, पिपलघाट, राजघाट, सतियारा घाट, बोहरड़ा, हतनूर, नाचनखेड़ा, पातोंडी से होकर अंतुर्ली महाराष्ट्र की ओर जाती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नदी घाटी एवं सहायक नदियां</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">ताप्ती नदी की घाटी का विस्तार कुल 65,145 किमी में है। यह घाटी क्षेत्र महाराष्ट्र में 51, 504 किमी, मध्यप्रदेश में 9,804 किमी एवं गुजरात में 3,837 किमी है। ये घाटी महाराष्ट्र उत्तरी एवं पूर्वी जिलों जैसे अमरावती, अकोला, बुलढाना, वाशिम, जलगांव, धुले, नंदुरबार एवं नासिक में फैली है। साथ ही मध्यप्रदेश के बैतूल और बुरहानपुर तथा गुजरात के सूरत एवं तापी जिलों में इसका विस्तार है। इसके जलग्रहण क्षेत्र का 79 फीसदी गुजरात शेष मध्यप्रदेश तथा महाराष्ट्र राज्य में पड़ता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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