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	<title>Samsamyik &#8211; संकल्प शक्ति</title>
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	<description>राष्ट्रीय साप्ताहिक समाचार पत्र</description>
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		<title>समय से आगे की सोच रखते थे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Jul 2025 07:30:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समसामयिक]]></category>
		<category><![CDATA[current affair]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भारतीय राजनीति और समाज में उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण और समय से आगे की सोच के लिए जाना जाता है। उनके जीवन और कार्यों ने दिखाया कि वे न केवल अपने समय के मुद्दों को समझते थे, बल्कि भविष्य की चुनौतियों और अवसरों का भी गहरा ज्ञान रखते थे। देश और [&#8230;]</p>
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<p class="wp-block-paragraph">डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भारतीय राजनीति और समाज में उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण और समय से आगे की सोच के लिए जाना जाता है। उनके जीवन और कार्यों ने दिखाया कि वे न केवल अपने समय के मुद्दों को समझते थे, बल्कि भविष्य की चुनौतियों और अवसरों का भी गहरा ज्ञान रखते थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">देश और समाज के लिए तुष्टिकरण की राजनीति कितना नुक़सान पहुंचा सकती है, इसको हमारे कई दार्शनिक समाजसेवियों ने दशकों पहले समझ लिया था। एक देश और एक विधान का मंत्र देने वाले डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी ने इसके लिए मिसाल पेश की। स्वतंत्र भारत की पहली सरकार ने तुष्टिकरण की नीति पर चलना शुरू किया, तो डॉ. मुखर्जी ने कैबिनेट से इस्तीफा देकर भारतीय जनसंघ की स्थापना की। आज केंद्र में भाजपा की लगातार तीसरी बार सरकार बनी है और माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के हाथों में देश की बागडोर है। इसके पीछे डॉ मुखर्जी की ही नीति और सोच है। 06 जुलाई को उनका बलिदान दिवस है।&nbsp;&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">हम सभी को मालूम है कि आज़ादी मिलने के बाद बनी पहली केंद्र सरकार से डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी के मतभेद देखने को मिले थे और जब तत्कालीन नेहरू सरकार ने भारत के संविधान में जबरन अनुच्छेद 370 जोड़कर देश की संप्रभुता और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास किया था, तब अखंड भारत के समर्थक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कांग्रेस की तुष्टीकरण नीति का विरोध किया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;गौरतलब है कि&nbsp; जवाहरलाल नेहरू ने डॉ. मुखर्जी को अंतरिम सरकार में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में शामिल किया। नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली के बीच हुए समझौते के पश्चात 06 अप्रैल 1950 को उन्होंने मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर-संघचालक गुरु गोलवलकर जी से परामर्श लेकर श्री मुखर्जी ने 21 अक्टूबर 1951 को राष्ट्रीय जनसंघ की स्थापना की।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">डॉ. मुखर्जी भारत की अखंडता और कश्मीर के विलय के दृढ़ समर्थक थे। उन्होंने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को भारत के बाल्कनीकरण की संज्ञा दी थी। अनुच्छेद 370 के राष्ट्रघातक प्रावधानों को हटाने के लिए भारतीय जनसंघ ने हिन्दू महासभा और रामराज्य परिषद के साथ सत्याग्रह आरंभ किया था। डॉ. मुखर्जी 11 मई 1953 को कुख्यात परमिट सिस्टम का उल्लंघन करके कश्मीर में प्रवेश करते हुए गिरफ़्तार कर लिए गए। गिरफ़्तारी के दौरान ही विषम परिस्थितियों में 23 जून 1953 को उनका स्वर्गवास हो गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन और कार्य एक अद्वितीय उदाहरण है, जिसमें उन्होंने शिक्षा, राजनीति और समाज सुधार के विभिन्न मोर्चों पर उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका जन्म 06 जुलाई 1901 को एक प्रतिष्ठित बंगाली भद्रलोक परिवार में हुआ था, जो उस समय अपनी बौद्धिकता और सांस्कृतिक योगदान के लिए विख्यात था।</p>
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		<title>अषाढ़ शुक्ल सप्तमी को ऐसी नदी का जन्मदिन है, जिसके स्मरण मात्र से पुण्य का फल प्राप्त होता है</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Jul 2025 05:24:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समसामयिक]]></category>
		<category><![CDATA[Nadi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>बुरहानपुर। आषाढ़ शुक्ल सप्तमी को जन्मी ताप्ती नदी का वेद और पुराणों में विशेष उल्लेख है। ताप्ती को सूर्य की बेटी माना जाता है और इसके जल में पूजन, दीपदान, तर्प, पिडदान का विशेष महत्त्व है। ताप्ती तट पर देवऋषि नारद, शांडिल्य, चांगदेव, मार्कण्डेय, उद्धालक, गौतम, ईवासा के साथ कई ऋषियों ने तप किया।  ताप्ती [&#8230;]</p>
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<p class="wp-block-paragraph">बुरहानपुर। आषाढ़ शुक्ल सप्तमी को जन्मी ताप्ती नदी का वेद और पुराणों में विशेष उल्लेख है। ताप्ती को सूर्य की बेटी माना जाता है और इसके जल में पूजन, दीपदान, तर्प, पिडदान का विशेष महत्त्व है। ताप्ती तट पर देवऋषि नारद, शांडिल्य, चांगदेव, मार्कण्डेय, उद्धालक, गौतम, ईवासा के साथ कई ऋषियों ने तप किया।  ताप्ती देश की प्रमुख पवित्र नदियों में से एक है। पुरातन काल में नदी तटों को ही मनुष्य ने निवास के लिए उपयुक्त जाना और नदी तटों पर ही सभ्यता, संस्कृति और नगरों का निर्माण हुआ। इसलिए ब्रघ्नपुर (बुरहानपुर का पूर्व नाम) ताप्ती तट पर हज़ारों साल पूर्व से बसा है। ताप्ती को तापी, तापनाशनी और सूर्य तनया सहित अन्य नामों से जाना जाता है। इसका अर्थ ताप्ती त्रिविध ताप को शांत करने वाली है। गंगाजी में चिरकाल तक स्नान करने से, नर्मदा के दर्शन करने और सरस्वती के संगम के जल का पान करने से जो फल प्राप्त होता है, वह मां ताप्ती के केवल स्मरण मात्र से ही प्राप्त हो जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;गौरतलब है कि ताप्ती नदी मुलताई से 193 किमी तक बहकर बुरहानपुर पहुंचती है। ताप्ती का जल जीवित व मृतक दोनों के लिए वरदान है। ताप्ती का जल पवित्र और चर्म रोग मिटाने वाला है। कोढ़ का इलाज करने का भी गुण इस जल में है। नारदजी का कोढ़ग्रस्त शरीर और राजा भोसले के वंशज का रोगग्रस्त शरीर ताप्ती के स्नान करने से ही स्वस्थ हुआ। यही कारण है कि ताप्ती में विसर्जित अस्थियां शीघ्र गल जाती हैं। ताप्ती ने अपने पिता सूर्य का सदैव मान सम्मान बढ़ाया।&nbsp;&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"> <strong>यह है ताप्ती का मार्ग</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">बुरहानपुर ज़िले में ताप्ती नदी देड़तलाई, तुकईथड़, पलासुर, सीवल, नावथा, लिंगा, नागझिरी, पिपलघाट, राजघाट, सतियारा घाट, बोहरड़ा, हतनूर, नाचनखेड़ा, पातोंडी से होकर अंतुर्ली महाराष्ट्र की ओर जाती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नदी घाटी एवं सहायक नदियां</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">ताप्ती नदी की घाटी का विस्तार कुल 65,145 किमी में है। यह घाटी क्षेत्र महाराष्ट्र में 51, 504 किमी, मध्यप्रदेश में 9,804 किमी एवं गुजरात में 3,837 किमी है। ये घाटी महाराष्ट्र उत्तरी एवं पूर्वी जिलों जैसे अमरावती, अकोला, बुलढाना, वाशिम, जलगांव, धुले, नंदुरबार एवं नासिक में फैली है। साथ ही मध्यप्रदेश के बैतूल और बुरहानपुर तथा गुजरात के सूरत एवं तापी जिलों में इसका विस्तार है। इसके जलग्रहण क्षेत्र का 79 फीसदी गुजरात शेष मध्यप्रदेश तथा महाराष्ट्र राज्य में पड़ता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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