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	<title>ऋषिवाणी &#8211; संकल्प शक्ति</title>
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	<description>राष्ट्रीय साप्ताहिक समाचार पत्र</description>
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	<title>ऋषिवाणी &#8211; संकल्प शक्ति</title>
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		<title>चहुंओर चल चुकी है परिवर्तन की लहर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Feb 2024 04:26:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ऋषिवाणी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#8216;शक्ति चेतना जनजागरण शिविर&#8217; समग्र समाज को नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान्, चेतनावान्, परोपकारी व पुरुषार्थी बनाने का माध्यम है। जब लोग पूर्ण नशामुक्त होंगे, मांसाहारमुक्त होंगे, चरित्रवान् होंगे, चेतनावान् होंगे, पुरुषार्थी होंगे, परोपकारी होंगे, तभी ऋषियों की पावन भारतभूमि अपने सनातनधर्म के पूर्णस्वरूप को प्राप्त कर सकेगी। ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज [&#8230;]</p>
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<p class="wp-block-paragraph">&#8216;शक्ति चेतना जनजागरण शिविर&#8217; समग्र समाज को नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान्, चेतनावान्, परोपकारी व पुरुषार्थी बनाने का माध्यम है। जब लोग पूर्ण नशामुक्त होंगे, मांसाहारमुक्त होंगे, चरित्रवान् होंगे, चेतनावान् होंगे, पुरुषार्थी होंगे, परोपकारी होंगे, तभी ऋषियों की पावन भारतभूमि अपने सनातनधर्म के पूर्णस्वरूप को प्राप्त कर सकेगी। ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के द्वारा एक के बाद एक किये गए शक्ति चेतना जनजागरण शिविरों और नशामुक्ति जनाजगरण सद्भावना यात्राओं के सुयोग का ही प्रतिफल है कि हमारे भारत देश में चहुंओर परिवर्तन की लहर चल चुकी है। शिविरों के क्रम में दिनांक 10-11 फरवरी 2024 को बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में 128वें शक्ति चेतना जनजागरण शिविर का विशाल कार्यक्रम सम्पन्न किया गया। ऋषिवर का कथन है कि &#8221;यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक कि सम्पूर्ण समाज आत्मिकचेतना से परिपूर्ण नहीं होजाता तथा अनीति-अन्याय-अधर्म, भ्रष्टाचार, अत्याचार व व्याप्त व्यभिचार, समूलरूप से नष्ट नहीं होजाते।</p>
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		<title>बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में दिनांक 10-11 फरवरी को शक्ति चेतना जनजागरण शिविर का विशाल आयोजन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 08 Feb 2024 01:28:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ऋषिवाणी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>संकल्प शक्ति। समाज को नशे-मांसाहार व चरित्रहीनता से मुक्त कराने एवं मानवीय कर्तव्यों का बोध कराने के लिये ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के निर्देशन में भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के द्वारा संयुक्त रूप से शक्ति चेतना जनजागरण शिविरों, धार्मिक अनुष्ठानों व नशामुक्ति जनजागरण सद्भावना यात्रा के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">संकल्प शक्ति। समाज को नशे-मांसाहार व चरित्रहीनता से मुक्त कराने एवं मानवीय कर्तव्यों का बोध कराने के लिये ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के निर्देशन में भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के द्वारा संयुक्त रूप से शक्ति चेतना जनजागरण शिविरों, धार्मिक अनुष्ठानों व नशामुक्ति जनजागरण सद्भावना यात्रा के माध्यम से करोड़ों परिवारों में माता भगवती की भक्तिरूपी दीप प्रज्ज्वलित करके सुख, शांति व समृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया गया है और यह अभियान निरन्तर गतिशील है। इसी क्रम में दिनांक 10-11 फरवरी 2024 को साइन्स कॉलेज ग्राउण्ड, सरकण्डा, जि़ला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में शक्ति चेतना जनजागरण शिविर का विशाल आयोजन किया जा रहा है। इस शिविर में लाखों लोग शामिल होकर अपने जीवन को सदमार्ग पर बढ़ाने के लिए अद्वितीय प्रेरणा प्राप्त करेंगे।   </p>



<p class="wp-block-paragraph">वेद-पुराणों, रामायण और गीता में धर्म-अध्यात्म व कर्मपथ पर बढऩे के लिये तरह-तरह के दृष्टांत दिये गये हैं, लेकिन उन भावों को ग्रहण करने के लिये पर्याप्त समय, गहन अध्ययन, विकसित मस्तिष्क और पवित्र विचारों की आवश्यकता है। ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने अपने शिष्यों को धर्म-अध्यात्म के क्षेत्र में ही नहीं, वरन् जीवन के सर्वांगीण विकास के लिये समस्त वेद-शास्त्रों का सार अपने चिन्तनों में समाहित करके समाज के सामने एक सशक्त विचारधारा के रूप में प्रदान किया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> आप नित्यप्रति विचार करें कि मैं अपने विचारों को भटकने नहीं दूँगा और विचारों की उत्कृष्टता के लिए सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के अमोघ चिन्तन एवं उनकी जीवनी का अध्ययन करूँगा तथा स्वयं को उसी अनुरूप ढालने का प्रयास करूँगा। किसी के प्रति द्वेषभाव नहीं रखूँगा और अपना स्वभाव मधुर रखूँगा। कभी किसी की द्वेषपूर्ण आलोचना नहीं करूँगा और मेरे सामने जो भी समस्याएं आयेंगी, उन्हें धीरे-धीरे सुलझाने का प्रयास करूँगा तथा यह सोचकर मन को उद्विग्न नहीं होने दूँगा कि समस्याओं का निदान कैसे होगा? ये विचार ही आपकी समस्याओं के निदान और निर्भयता प्रदान करने वाले हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> प्रकृतिसत्ता माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी का अंश आत्मा के रूप में हमारे अंदर विद्यमान है और &#8216;माँ &#8216; ने उस अनमोल अंश को रखने के लिये शरीररूपी अनमोल मंदिर दिया है, जिसके अन्दर निखिल ब्रह्माण्ड समाहित है। प्रकृति ने हमारे लिये ज्ञान का भंडार खोल रखा है, जिसे हम अपनी सामथ्र्यानुसार प्राप्त कर सकते हैं। फिर भी हम व्यथित हैं, नाना प्रकार की समस्याओं से ग्रसित हैं। आखिर क्यों? इसलिए कि हम योग-ध्यान-साधना में प्रवृत्त ही नहीं हो पा रहे हैं और हमारे विचार व कर्म ही शुद्ध व सात्विक नहीं हैं। जबकि, प्रकृतिसत्ता हमसे चाहती है कि हमारे विचार शुद्ध एवं सात्विक हों और कर्म साधना से परिपूर्ण हो। </p>



<p class="wp-block-paragraph"> ध्यान रखें; जीवन में जो भी चल रहा है, वह हमारी नकारात्मक और सकारात्मक सोच का परिणाम है। सकारात्मक सोच वाले तो लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते जा रहे हैं, जबकि नकारात्मक सोच वाले बहुत पीछे हैं। सकारात्मक सोच जहाँ शान्ति प्रदान करती है, वहीं लक्ष्य की ओर कदम आगे बढ़ते चले जाते हैं। अपने अन्दर दृढ़ विश्वास जाग्रत् करो, स्थायित्व धारण करो कि हम नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् जीवन जिएंगे और जीवन के किसी भी मोड़ पर किसी के भी बहकावे में नहीं आएंगे। इससे आपकी व्यथा, आपका समस्याएं दूर होती चली जायेंगी और आप धर्म, राष्ट्र एवं मानवता के रक्षक बनेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ऋषिवर श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के हृदय की विशालता का आकलन करना सहज नहीं है। आपश्री अपने शिष्यों से कहते हैं कि &#8221;तुम चाहे जहाँ रहो, मैं सदैव तुम्हारे साथ हूँ। मैं तुम्हारा रक्षाकवच हूँ, मैं तुम्हारे लिये ही जीता हूँ और अपनी अनुभूतियों का फल तुम्हें देता हूँ। तुम मेरे चेतना के अंश हो और मेरे हृदय में रहते हो। मेरी दृष्टि सदैव तुम्हारे ऊपर रहती है कि तुम्हारा उत्थान हो रहा है या नही! मैं सबकुछ देखता हूँ।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> छत्तीसगढ़ के जि़ला-बिलासपुर में आयोजित द्विदिवसीय शक्ति चेतना जनजागरण शिविर में ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के चेतनात्मक चिन्तन, मार्गदर्शन, योग-ध्यान-साधना के क्रम, गुरुदीक्षा और दिव्य आरतियों का कार्यक्रम है। इसमें शामिल होकर आप अपने जीवन को अध्यात्मिक दिशा देने के साथ ही प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। </p>
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		<title>आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की कृपा से अयोध्या</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Jan 2024 04:59:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ऋषिवाणी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>संकल्प शक्ति। धर्मसम्राट् युग चेतना पुरुष सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के द्वारा अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा से पूर्व; मकर संक्रान्ति पर्व पर, दिनांक 15 जनवरी 2024 को अपने चेतनाअंशों, शिष्यों-भक्तों, देशवासियों और विश्वजनमानस को आशीर्वाद प्रदान करते हुए चिन्तन प्रदान किया गया&#8211; &#8221;सनातनधर्म को लेकर अयोध्या में भगवान् श्रीराम [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>संकल्प शक्ति।</strong> धर्मसम्राट् युग चेतना पुरुष सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के द्वारा अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा से पूर्व; मकर संक्रान्ति पर्व पर, दिनांक 15 जनवरी 2024 को अपने चेतनाअंशों, शिष्यों-भक्तों, देशवासियों और विश्वजनमानस को आशीर्वाद प्रदान करते हुए चिन्तन प्रदान किया गया&#8211;</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8221;सनातनधर्म को लेकर अयोध्या में भगवान् श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा के संदर्भ में जो द्वंद्व छिड़ा हुआ है, उस पर कुछ विचार व्यक्त करने के लिए सनातन समाज के सामने उपस्थित हुआ हूँ। सनातनधर्म ने सदैव संघर्ष का रास्ता तय किया है और मैंने अपना पूरा जीवन सनातनधर्म के उत्थान तथा मानवता के कल्याण हेतु समर्पित किया है। आज का दिवस मकर संक्रान्ति के योगों से युक्त अतिपावन है। भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ता देश के कोने-कोने में जनजागरण में व्यस्त रहते हैं, तो आज भी उनका यह क्रम ज़ारी रहेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अयोध्या धाम के सम्बंध में जो द्वंद्व उपस्थित किया गया है, उस पर सत्य के विचारों को प्रकट करना आवश्यक है। सनातनधर्म को पूर्णरूपेण स्थापित करने के लिए, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जन्मभूमि पर मंदिर बनाने के लिए, श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए पाँच सौ वर्ष से अधिक समय तक संघर्ष करना पड़ा, तब जाकर आज यह पावन दिन देखने को मिल रहा है और प्राण-प्रतिष्ठा की जो तिथि निश्चित की गई है, उसका सबको स्वागत करना चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>प्राण-प्रतिष्ठा के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी पूरी तरह उचित हैं</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">शंकराचार्यों के द्वारा इस पर जो विचार रखे गए, क्या वह उचित हैं? उनके द्वारा कहा गया कि नरेन्द्र मोदी के द्वारा प्राण-प्रतिष्ठा किया जाना उचित नहीं है। मैं कहूंगा कि प्राण-प्रतिष्ठा के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी पूरी तरह उचित हैं। वे सनातनधर्मी हैं, ब्रह्मचारी हैं, साधक हैं और सनातनधर्म के साथ ही देश के लिए भी बहुत कुछ कर रहे हैं। ऐसे विराट व्यक्तित्त्व के धनी व्यक्ति के लिए यदि जाति के आधार पर कोई बात की जाए, तो वहाँ पर बोलना उचित होजाता है। श्रीराम को हम प्राणस्वरूप मानते हैं और आक्रमणकारियों ने उनके जन्मस्थान पर बने मंदिर को ध्वस्त किया, उसका स्वरूप बदला गया, लेकिन वे अवशेष समाप्त नहीं कर पाए। वहाँ पर राममंदिर का निर्माण होने के साथ ही प्राण-प्रतिष्ठा हो रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की कृपा से अयोध्या में भगवान् श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा होने जा रही है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, जो कण-कण में व्याप्त हैं, भला उनकी कृपा के बिना कोई क्रम हो सकता है? जहाँ पर बजरंगबली की कृपा हो कि वहाँ पर कभी भूत-पिशाचों की बाधा नहीं होगी, वहाँ के लिए कहा जा रहा है कि भूत-पिशाचों का वास हो जायेगा! मैं सभी धर्मगुरुओं से कहना चाहता हूँ कि जिस कार्य के लिए विश्व के जनमानस में उत्सुकता व्याप्त है, जिनकी श्रद्धा श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा से जुड़ी हुई है, तो आप लोग कैसे त्रिकालदर्शी हो? कहते हैं कि मंदिर का पूर्ण निर्माण नहीं हुआ है। अरे, गर्भगृह की स्थापना हो चुकी है और जितना निर्माणकार्य हो चुका है, प्राण-प्रतिष्ठा के लिए पर्याप्त है। यदि आत्मज्ञानी नहीं बनोगे, तो जीवनभर भटकते रहोगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अनीति-अन्याय-अधर्म के विरुद्ध उठती रहेगी मेरी आवाज़</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">हमारे शंकराचार्य योगी हैं, ज्ञानी हैं और उनके द्वारा विरोध किया जाए, तो मेरा मानना है कि उन्हें इस सत्य को स्वीकार करना चाहिए कि योगी आदित्यनाथ ने, उत्तरप्रदेश की सरकार ने सनातन के लिए अपना सर्वस्व समर्पण किया है, अत: उन पर प्रश्नचिन्ह लगाना बन्द करें। मेरी आवाज़ हमेशा अनीति-अन्याय-अधर्म के लिए उठती रहेगी। मैं कौन हूँ? यह पहचानने की ज़रूरत है। मैं योगीराज हूं, मैं सच्चिदानंद का अवतार हूं। अयोध्या का जो विकास हो रहा है, वह सराहनीय है। इसके लिए समाज नरेन्द्र मोदी और योगी आदित्यनाथ का हमेशा ऋणी रहेगा। ये दोनों आत्माएं कोई सामान्य आत्माएं नहीं हैं, बल्कि परमधाम की चैतन्य आत्माएं हैं, ऋषिआत्माएं हैं। जाति के आधार पर प्रश्न उठाना, कैसे ज्ञानी हो? अरे, जन्म से तो सभी शूद्र होते हैं और यह आप लोग भी कहते रहते हो।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कैसी विचारधारा का जीवन जी रहे हैं शंकराचार्य?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">आज श्रीराम की कृपा से, माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की कृपा से यह पावन दिन देखने को मिल रहा है। हमारे सम्मानित शंकराचार्यों का यह कहना कि जब हमारा समय आयेगा, तब देखेंगे! कैसी विचारधारा का जीवन जी रहे हो? सनातनधर्म के उत्थान के लिए आज से अधिक अच्छा समय और कब आयेगा? यह युगपरिवर्तन का समय है। सभी शंकराचार्य योग्य हैं, सक्षम हैं, बहुत कुछ कर सकते हैं, लेकिन कुछ कर नहीं पा रहे हैं। आखिर क्यों?। मेरे द्वारा अनेक बार कहा जा चुका है कि सत्य के लिए, मानवता के लिए, सनातनधर्म की रक्षा के लिए आगे आइए और अनीति-अन्याय-अधर्म के विरुद्ध सड़क पर उतरकर आवाज़ उठाइए।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मानवता के लिए आज तक क्या कार्य किया?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में उपस्थित नहीं होना चाहते! यदि चारों शंकराचार्य उपस्थित होते, तो हमारा सनातनधर्म गौरवान्वित होता। मैं पूछना चाहता हूँ कि आप लोगों ने आज तक क्या कार्य किया है? नशामुक्त समाजनिर्माण के लिए, मानवता के लिए, सत्यधर्म के उत्थान के लिए, गौ-संरक्षण के लिए क्या किया है? जिससे समाज एकजुट हो पाता। केवल सनातन-सनातन कहकर अपने मठ और मंदिरों तक ही सीमित रहे आए। यदि कोई भी साधु-संत-वैरागी सत्य की आवाज़ नहीं बोल सकता, तो इससे सिद्ध होता है कि उनमें कहीं-न-कहीं, कुछ-न-कुछ कमी है। साधु-सन्तों की हत्या हुई, साधु-सन्तों को पीटा जा रहा है, फिर भी ये शंकराचार्य चुप हैं! इस पर भी आज तक आवाज़ नहीं उठाई गई और सनातन की बात करते हैं। अच्छा होता कि चारों शंकराचार्य प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में पहुंचते और प्रधानमंत्री मोदी जी से कहते कि देश को ज़्यादा और कुछ नहीं दे सकते, तो कम से कम देश को पूर्ण नशामुक्त घोषित कर दो और नहीं तो उत्तरप्रदेश को ही नशामुक्त घोषित कर दो और यदि देश को नशामुक्त घोषित नहीं किया गया या उत्तरप्रदेश को नशामुक्त घोषित नहीं किया गया, तो हम सड़क पर उतरकर आन्दोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि &#8216;आत्मा की अमरता और कर्म की प्रधानता एक शाश्वत सत्य है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्या किसी शंकराचार्य का सूक्ष्मशरीर जाग्रत् है?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">क्या किसी शंकराचार्य का सूक्ष्मशरीर जाग्रत् है? एक भी शंकराचार्य ने अपने सूक्ष्मशरीर को जाग्रत् नहीं किया है और न ही वे आत्मज्ञानी हैं। यदि अपने सूक्ष्मशरीर को जाग्रत् किया होता, आत्मज्ञानी होते, तो उनकी एक आवाज़ पर समाज एकजुट होजाता। विपरीत समय को अपने अनुकूल बना लेने वाला ही साधक होता है। शंकराचार्य एक बार मानवता के कल्याण के लिए सामने तो आएं। मेरा पूरा जीवन महाशक्तियज्ञ के लिए, सनातनधर्म के उत्थान के लिए समर्पित है और मेरे लाखों स्वयंसेवी कार्यकर्ता समाजकल्याण के कार्य में लगे हुए हैं। भगवती मानव कल्याण संगठन ने इतने कम समय में मानवता के कल्याण के लिए जितना कार्य किया है, वह किसी अन्य संगठन के वश की बात नहीं है। जब बाबरी मस्जि़द का विध्वंश हुआ, तब भी मेरी वहाँ उपस्थिति थी और जब श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा होगी, तब भी मैं वहाँ उपस्थित रहूंगा। शंकराचार्य बताएं कि क्या उनका सूक्ष्मशरीर जाग्रत् है?</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम से सभी लोग जुड़ें</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">22 जनवरी को भगवान् श्रीराम के नाम की एक-एक ज्योति अवश्य जलाएं। धीरे-धीरे अयोध्या का विकास और होता चला जायेगा और एकदिन ऐसा आयेगा, जब श्रीराम मंदिर की दीवारें स्वर्णजडि़त हो जायेंगी। प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम से सभी लोग जुड़ें और अपने-अपने घरों में श्रीरामचरितमानस का पाठ करें तथा समय मिलने पर अयोध्या अवश्य जाएं। मैंने भी अपने लाखों शिष्यों के साथ इसी वर्ष दिसम्बर माह में अयोध्या जाने का निर्णय लिया है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">वर्तमान में मोदी और योगी सरकारें बहुत अच्छा कार्य कर रहीं हैं। मैं एक बार फिर कहता हूँ कि प्राण-प्रतिष्ठा के लिए नरेन्द्र मोदी जी पूरी तरह उपयुक्त हैं। समस्त मानवसमाज को मैं पुन: अपना पूर्ण आशीर्वाद प्रदान करता हूँ।</p>
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		<title>नया वर्ष भारत को ऊँचाइयों की ओर ले जायेगा और बढ़ते क्रम में प्रवाहित होगी अध्यात्मिक ऊर्जा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Jan 2024 06:36:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ऋषिवाणी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>संकल्प शक्ति। धर्मसम्राट् युग चेतना पुरुष सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने नूतन वर्ष 2024 के प्रथम दिवस; दिनांक 01 जनवरी को अपने चेतनाअंशों, शिष्यो-भक्तों, देशवासियों और विश्वजनमानस को आशीर्वाद प्रदान करते हुए चिन्तन दिया कि &#8221;हमारे सनातनधर्म में चैत्र नवरात्र प्रतिपदा से नए वर्ष का प्रारम्भ होता है, लेकिन जब किसी चीज [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">संकल्प शक्ति। धर्मसम्राट् युग चेतना पुरुष सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने नूतन वर्ष 2024 के प्रथम दिवस; दिनांक 01 जनवरी को अपने चेतनाअंशों, शिष्यो-भक्तों, देशवासियों और विश्वजनमानस को आशीर्वाद प्रदान करते हुए चिन्तन दिया कि &#8221;हमारे सनातनधर्म में चैत्र नवरात्र प्रतिपदा से नए वर्ष का प्रारम्भ होता है, लेकिन जब किसी चीज को सम्पूर्ण समाज आत्मसात कर लेता है, जैसे कि अंग्रेज़ी वर्ष के कैलेण्डर के अनुसार प्रारम्भ दिनांक 01 जनवरी को नववर्ष के रूप में मनाया जाना, तो इसे भी मानना न्यायोचित माना जाना चहिए। इसलिए हम इसे भी मनाते हैं। चाहे कोई भी क्रम प्रारम्भ हो, उसे अध्यात्मिकस्वरूप देकर धार्मिक वातावरण में शुरू करना चाहिए, लेकिन देखा जाता है कि पश्चिमीसभ्यता में रंगे लोग इस नए वर्ष के प्रारम्भ दिवस को प्राय: फिल्मी धुनों, नाच-गाने, शराब व ड्रग्स के नशे और फूहड़पन में व्यतीत करते हैं, जा कतई ठीक नहीं है।&nbsp;&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ता आज के दिन को अध्यात्मिकस्वरूप देते हुए 24 घंटे या 05 घंटे के श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ और माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की दिव्य आरती करके मनाते हैं। देशभर में हज़ारों-हज़ार स्थानों पर समाज के बीच यह क्रम समारोहपूर्वक सम्पन्न किए जाते हैं, जिससे &#8216;माँÓ की कृपा प्राप्त करके मानवसमाज विकारों से मुक्त होकर सुख-शांति-समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ता रहे। आगे चलकर चैत्र प्रतिपदा के दिन को नूतन वर्ष के रूप में मनाने हेतु व्यापक स्वरूप दिया जायेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मेरी शुभकामना है, मेरा आशीर्वाद है कि यह नया वर्ष भारत को उन्नति की ओर, ऊँचाइयों की ओर ले जायेगा और अध्यात्मिकऊर्जा बढ़तेक्रम में प्रवाहित होगी। आप लोगों ने युगपरिवर्तन का शंखनाद किया है, महाशक्ति शंखनाद किया है, फलस्वरूप परिवर्तन आप देख ही रहे हैं। यह शक्ति का युग है, &#8216;माँÓ का युग है। देवताओं पर भी जब संकट आता है, तो माता आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की कृपा से वह संकट दूर होता चला जाता है। भगवान् श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में भव्य राममंदिर का बनना विश्व की मानवता की सफलता है और &#8216;माँÓ की कृपा से उस मंदिर का लोकार्पण समारोह दिनांक 22 जनवरी 2024 को होने जा रहा है। उस दिन सभी लोग कम से कम 05 घंटे का श्री दुर्गाचालीसा पाठ अवश्य करें। इतना ही नहीं, रामचरितमानस का पाठ करके मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवनचरित को अपने जीवन में उतारें। केवल जय श्रीराम कह देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनके पदचिन्हों पर चलना पड़ेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दिनांक 22 जनवरी को अयोध्या में नवनिर्मित राममंदिर में रामलला की स्थापना और मंदिर का लोकार्पण समारोह है, तो दिनांक 23 जनवरी को इस पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम धाम का स्थापना दिवस है। ये दो दिन आपको अध्यात्मिकक्रम के लिए मिल रहे हैं, जो कि आपके सौभाग्य को बढ़ाने वाले हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नशामुक्ति से ही साकार होगी रामराज्य की कल्पना&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">राममंदिर के निर्माण का श्रेय, इस बात का लाभ यदि भाजपा लेना चाहती है, तो लेना ही चाहिए, क्योंकि भाजपा ने सनातनधर्म के लिए कुछ कार्य किया है। मोदी और योगी के द्वारा सनातनधर्म के लिए जो कार्य किया जा रहा है, उसके लिए वे बधाई के पात्र हैं, परन्तु&#8230;। कहते हैं कि राम आएंगे, हमारे सनातनधर्म का परचम फहरायेगा, अध्यात्मिकऊर्जा से हमारा देश प्लावित होगा, तो ठीक बात है, लेकिन यह तभी होगा, जब पूरा देश नशामुक्त घोषित होजायेगा और जब तक देश नशामुक्त नहीं होगा, तब तक यह सम्भव नहीं है, क्योंकि नशे के चलते अपराध बढ़तेक्रम में हंै, फिर रामराज्य की कल्पना कैसे साकार हो सकती है? सभी क्षेत्रों में हम विकास के पथ पर बढ़ रहे हैं, लेकिन समाज किस दिशा में जा रहा है, इस पर किसी का ध्यान नहीं है! हमें समाज को भी देखना पड़ेगा तथा हमें नशे-मांसाहार से मुक्त, चरित्रवान् और चेतनावान् समाज का निर्माण करना होगा। इस विचारधारा पर काम करने की ज़रूरत है, अपने अन्दर दया, ममता, प्रेम, करुणा स्थापित करने की ज़रूरत है, तभी अध्यात्मिकऊर्जा का प्रवाह फैलेगा।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बिलासपुर शिविर के लिए आवाहन</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">भगवती मानव कल्याण संगठन के द्वारा दिनांक 10-11 $फरवरी 2024 को बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में शक्ति चेतना जनजागरण शिविर का आयोजन किया गया है और उस शिविर के लिए मैं आवाहन करूँगा कि अधिक से अधिक लोग शिविर का लाभ लें। एक-एक शिविर महत्त्वपूर्ण होता है, जिसमें माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की दिव्य आरती की जाती है और उस दिव्य आरती को प्राप्त कर लेने से जीवन में बहुतकुछ परिवर्तन आता चला जाता है। मैं चाहूँगा कि देश के कोने-कोने से जो भी नशा करते हों, यदि उनका नशा छुड़वाना चाहते हैं, तो बिलासपुर में आयोजित शिविर में आप उन्हें लेकर उपस्थित हो सकते हैं। निश्चित रूप से दो दिन के इस शिविर में यदि सम्मिलित होंगे, तो वहाँ से नशामुक्त होकर जायेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अपने अन्दर अध्यात्मिकशक्ति जगाएं</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">नित्यप्रति अपने समय का सदुपयोग करें, क्योंकि जो समय निकल जाता है, वह पुन: प्राप्त नहीं होता। अपने अन्दर अध्यात्मिकशक्ति को जगाने का प्रयास करें। बाह्य भौतिकजगत् की सम्पत्ति को एकत्रित करने की अपेक्षा अध्यात्मिकजगत् की सम्पत्ति एकत्रित करने की ललक आपके अन्दर होनी चाहिए और हम अपने अन्दर की इस सम्पत्ति को अपने कर्म के बल पर, अपने पुरुषार्थ के बल पर उजागर करके स्वयं के साथ समाज का कल्याण कर सकते हैं, केवल इच्छाशक्ति दृढ़ होनी चाहिए। आज समाज इस सत्य को स्वीकार करे या न करे, एक-न-एक दिन स्वीकार करना पड़ेगा कि वर्तमानकाल का यह समय शक्ति का है, माता आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा का है और उनकी कृपा से समाज में बहुतकुछ परिवर्तन हो रहा है।&nbsp;&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp;धर्मगुरु समाजहित में लगाएं अपनी सामथ्र्य</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">समाज के जो धर्मगुरु हैं, उनका नए वर्ष में आवाहन करता हूँ कि कम से कम इस नए वर्ष में अपनी सामथ्र्य को मानवता के कल्याण की दिशा में लगाने का प्रयास करें। आज यदि ये धर्मगुरु सच्चाई, ईमानदारी के साथ समाज के बीच, समाजहित में कार्य करना प्रारम्भ कर दें, तो समाज में बहुतकुछ बदलाव आ सकता है। जिसके पास जो सामथ्र्य है, उसे समाजकल्याण में लगाएं, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि समाज में उग्रता न बढऩे पाए। सनातनधर्म को मानने वालों को उग्र नहीं होना चाहिए। चेतनावान् और उग्रता में बहुत बड़ा अन्तर होता है। चेतनावान् अध्यात्मिकऊर्जा से परिपूर्ण होता है और वह सोच-विचार करके कार्य करता है तथा अनीति-अन्याय-अधर्म के कार्य नहीं करता। जबकि, उग्र व्यक्ति सोचता-समझता नहीं, क्योंकि वह अध्यात्मिक परिवेश में रहा ही नहीं। हमें हर पल प्रयास करना है कि समाज चेतनावान् बने और अपने परिवार को सुख-समृद्धि देने के साथ ही तड़पती, कराहती हुई मानवता को सामथ्र्य प्राप्त हो, इसके लिए एक सशक्त माध्यम बन सकें।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सामान्य बात नहीं है &#8216;माँÓ का अखण्ड गुणगान</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">इस पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम धाम में &#8216;माँÓ का अखण्ड गुणगान चल रहा है और यह कोई सामान्य बात नहीं है। इससे विश्व की मानवता लाभ उठा रही है। अयोध्या में सैकड़ों वर्ष के अथक प्रयास के बाद 22 जनवरी को रामलला की स्थापना और उनके भव्य मंदिर का लोकार्पण समारोह भी कोई सामान्य बात नहीं है, इससे हमारा सनातनधर्म हमेशा जीवंत रहेगा। यदि यह पावन पुनीत कार्य चैत्र नवरात्र पर रखा गया होता, तो और अच्छा होता, फिर भी एक अच्छे कार्य के लिए जो भी तिथि निश्चित की गई है, ठीक है। 22 जनवरी को हर व्यक्ति प्रभु श्रीराम के नाम की एक ज्योति अवश्य जलाए, जिससे विश्वजनमानस को प्रभु श्रीराम की कृपा प्राप्त हो सके।</p>
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		<title>जब अन्तर्मन शान्त होगा, तभी सतोगुणी कोशिकायें जाग्रत् होंगी- सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Jul 2023 06:21:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ऋषिवाणी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>संकल्प शक्ति। जिन स्वामी सच्चिदानंद स्वरूप ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज का चित्त शांत व मृदुल स्नेहिल मुस्कान से युक्त रूप हो तथा जिनके अमृततुल्य वचनों का श्रवण करके मनन करने से यह मानव शरीर चैतन्यशील होजाता हो, ऐसे सद्गुरुदेव जी महाराज के चिन्तन जीवनपथ पर बढऩे के लिए जीवनपर्यन्त प्रेरणा प्रदान [&#8230;]</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://sankalpshakti.in/%e0%a4%9c%e0%a4%ac-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a4%ad/">जब अन्तर्मन शान्त होगा, तभी सतोगुणी कोशिकायें जाग्रत् होंगी- सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://sankalpshakti.in">संकल्प शक्ति</a>.</p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>संकल्प शक्ति।</strong> जिन स्वामी सच्चिदानंद स्वरूप ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज का चित्त शांत व मृदुल स्नेहिल मुस्कान से युक्त रूप हो तथा जिनके अमृततुल्य वचनों का श्रवण करके मनन करने से यह मानव शरीर चैतन्यशील होजाता हो, ऐसे सद्गुरुदेव जी महाराज के चिन्तन जीवनपथ पर बढऩे के लिए जीवनपर्यन्त प्रेरणा प्रदान करते रहेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ऋषिवर का चिन्तन है कि &#8212;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">‘‘जीवन को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए मनुष्य के पास शान्ति के साथ अध्यात्मिक शक्ति होनी चाहिए, आत्मज्ञान होना चाहिए। जीवन में यदि दु:खों का निवारण करना है, तो शान्ति धारण करनी पड़ेगी। शान्ति का तात्पर्य आलस्य, अकर्मण्यता नहीं, बल्कि अन्त:करण में पवित्रता धारण करना है, जिससे अन्तर्मन सभी झंझावतों से दूर हो सके और जब अन्तर्मन शान्त होगा, तभी सतोगुणी कोशिकायें जाग्रत् होंगी। इस शरीर में असंख्य कोशिकायेें भरी हुई हैं और हर कोशिका में अपार शक्ति निहित है। अन्त:करण की पवित्रता के लिये सर्वप्रथम आपको अपने अन्दर व्याप्त हो चुके ‘ईष्र्या-द्वेष, अहंकार, दूसरों की निन्दा करने की प्रवृत्ति, काम, क्रोध, लोभ’ को दूर करना होगा।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमारे शरीर के अन्दर ही रक्षात्मक प्रणाली छिपी हुई है, जो असाध्य से असाध्य बीमारियों को भी दूर करने में सक्षम है। जब हम मन को एकाग्र करके ध्यानावस्थित मुद्रा में बैठते हैं, तो शरीर के अन्दर छिपी हुई रक्षात्मक प्रणाली सक्रिय होजाती है। इतना ही नहीं, सतोगुणी कोशिकायें चैतन्य होकर भविष्य की घटनाओं के बारे में भी संकेत देने लगती हैं, जिनसे आप बचाव कर सकते हैं। यहाँ तक कि मृत्यु को भी अपनी साधना के बल पर टाल सकते हैं।’’</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;सद्गुरुदेव जी महाराज ने&nbsp; हम सभी के कल्याण के लिए; दु:ख, संत्रास से मुक्ति के लिये ही पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम सहित हर उस स्थान पर अपनी चेतनातरंगें प्रवाहित कर रखी हैं, जहाँ सत्यधर्म का प्रवाह है, जहाँ नित्यप्रति माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की स्तुति होती है। अत: मन व हृदय को सम्पूर्ण रूप से निर्मल करके अपने-अपने घरों में श्री दुर्गाचालीसा का पाठ करें। माथे पर कुंकुम का तिलक, घरों में शक्तिध्वज, गले में रक्षाकवच धारण करे, शान्तिप्रद जीवन का यही मूल मन्त्र है। जिस तरह हर कार्य के लिये समय नियत है, ठीक उसी प्रकार प्रात: नित्यक्रिया से निवृत्त होने के पश्चात् कुछ समय इष्ट और सद्गुरु की पूजा-आराधना, ध्यान, साधना के लिये देना चाहिये, जिससे जीवन स्वच्छ व रमणीक बना रहे। गुरुवरश्री ने हमेशा अपने चिन्तन में हमें कुछ न कुछ दिया है। गुरुवरश्री ने बतलाया है कि प्रात: सोकर उठने से पहले अपने दोनों हथेलियों को आपस में रगडक़र पहले चेहरा फिर शरीर के अन्य अंगों का स्पर्श करें, क्योंकि सोते समय शरीर की ऊर्जा&nbsp; हथेलियों में एकत्रित होजाती है। उक्त विधि अपनाने से शरीर में पूरी तरह चैतन्यता आजाती है।इसके बाद मन में इस प्रकार की दिनचर्या निर्धारित करें कि समस्त कार्यो में उत्कृष्टता का समावेश हो और उसी के अनुरूप पूरा दिन व्यतीत करें, ताकि किसी प्रकार के भटकाव की स्थिति निर्मित न हो सके। तद्नुसार ही रात्रि में सोने से पूर्व, बिस्तर में एकाग्रचित्त होकर दिनभर के कार्यों का आंकलन करें, आत्ममंथन करें। यदि भूल से भी कहीं कोई त्रुटि रह गई हो, $गल्ती हो गई हो तो अगले दिन ही उस त्रुटि के लिये, उस भूल के लिये प्रायश्चित करें, जिससे दूसरे दिन के अन्य सभी कार्य श्रेष्ठता के साथ सम्पन्न हो सकें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;अलोपी शुक्ला</p>



<p class="wp-block-paragraph">कार्यकारी सम्पादक</p>
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		<title>सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के अमृत वचन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Jun 2023 03:33:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ऋषिवाणी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>The post <a rel="nofollow" href="https://sankalpshakti.in/%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4/">सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के अमृत वचन</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://sankalpshakti.in">संकल्प शक्ति</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<ul class="wp-block-list">
<li>पवित्रता, आनंद और शांति, मानवजीवन के अनमोलरत्न हैं।</li>
</ul>



<ul class="wp-block-list">
<li>जब तुम दूसरों का सहारा बनोगे, तो &#8216;माँ’ तुम्हारा सहारा स्वयं बन जायेंगी।</li>



<li>यदि शांति और निश्चिंतता चाहिए, तो परोपकारी बनो।</li>



<li>मधुर वाणी बोलें और आहार की शुद्धता व पवित्रता पर ध्यान दें।</li>



<li>सन्तुलित शाकाहार ही निरोगी जीवन का मूलमंत्र है।</li>



<li>तनाव से मुक्त होना है, तो स्वयं को विषय-विकारों से मुक्त करो।<br>प्रस्तुति<br>अलोपी शुक्ला<br>संकल्प शक्ति</li>
</ul>
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		<title>सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के अमृत वचन</title>
		<link>https://sankalpshakti.in/shri-shaktiputra-ji-maharaj-ke-amrit-vachan-2/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 05 Jun 2023 04:21:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ऋषिवाणी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://sankalpshakti.com/?p=7109</guid>

					<description><![CDATA[<p>प्रस्तुति-अलोपी शुक्लासंकल्प शक्ति</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<ul class="wp-block-list">
<li>स्वस्थ्य जीवन के लिए सहज प्राणायाम नितान्त आवश्यक है।</li>



<li>जो आनन्द ब्रह्मचर्य में है, विषय-विकारों को भोगने में नहीं।</li>



<li>वासना के कारण ही मनुष्य की उम्र घटती जा रही है।</li>



<li>परोपकार करने से मन हमेशा प्रफुल्लित रहता है।</li>



<li>अनीति-अन्याय-अधर्म से कमाया गया धन कभी फलीभूत नहीं होता।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">प्रस्तुति-<br>अलोपी शुक्ला<br>संकल्प शक्ति</p>
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			</item>
		<item>
		<title>ऋषिवर श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के अमृत वचन</title>
		<link>https://sankalpshakti.in/shri-shaktiputra-ji-maharaj-ke-amrit-vachan/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 04 Jun 2023 04:06:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ऋषिवाणी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सौदागर न बनें, सत्य के मार्ग को अपनायें तभी मुक्ति संभव है। सतोगुणी विचारधारा सत्य है और सत्य के साथ सान्निध्य सत्संग है। आप जहां पर हैं, जिस धरातल पर हैं, वहीं से अपने पतन को रोकें और अच्छाई की ओर बढ़ें। प्रलोभनों में फंसना जीवन को कष्ट के घेरे में डालना है। अधिक धन [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<blockquote class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow">
<p class="wp-block-paragraph">सौदागर न बनें, सत्य के मार्ग को अपनायें तभी मुक्ति संभव है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सतोगुणी विचारधारा सत्य है और सत्य के साथ सान्निध्य सत्संग है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आप जहां पर हैं, जिस धरातल पर हैं, वहीं से अपने पतन को रोकें और अच्छाई की ओर बढ़ें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रलोभनों में फंसना जीवन को कष्ट के घेरे में डालना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अधिक धन होने से कोई महान नहीं बन जाता, वह महान बनता है परहित करने से।</p>
</blockquote>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>प्रस्तुति</strong><br><strong>अलोपी शुक्ला<br>संकल्प शक्ति</strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>वह मानव, मानव नहीं, जो अपनी मूलसंस्कृति को भूल जाए -सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज</title>
		<link>https://sankalpshakti.in/jo-apani-sanskriti-bhul-jaye-wo-manav-nahi/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Apr 2023 05:26:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ऋषिवाणी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारतीय संस्कृति की पुनस्र्थापना एवं मानवीयमूल्यों की रक्षा के लिये सतत प्रयासरत ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज का चिन्तन है कि &#8221;भौतिकतावाद की आंधी में आत्मिक आनन्द की अनुभूति समाप्त होती जा रही है और समाज के लोगों के पास इतना समय नहीं है कि  इस आंधी को ठहराव देकर अपनी मूलसंस्कृति [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">भारतीय संस्कृति की पुनस्र्थापना एवं मानवीयमूल्यों की रक्षा के लिये सतत प्रयासरत ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज का चिन्तन है कि &#8221;भौतिकतावाद की आंधी में आत्मिक आनन्द की अनुभूति समाप्त होती जा रही है और समाज के लोगों के पास इतना समय नहीं है कि  इस आंधी को ठहराव देकर अपनी मूलसंस्कृति के लिये कुछ समय निकाल सकें। ध्यान, योग और &#8216;माँ’ की स्तुति के बल पर सोई हुई अन्तश्चेतना को जाग्रत् करके अपनी अस्मिता को वापस लाना होगा, अन्यथा भरसक प्रयास कर लें, किनारा मिलना सम्भव नहीं। वह मानव, मानव नहीं, जो कि अपनी मूलसंस्कृति को, माता आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा (मूल प्रकृतिसत्ता) को भूल जाये। विकास के अन्धानुकरण में हम अपनी अस्मिता, आत्मनिर्भरता व आत्माभिव्यक्ति को भूलते जा रहे हैं, मानव होकर मानव की परिभाषा भूल चुके हैं और यह विशाल परक अमूल्य जीवन निजी स्वार्थ तक सीमित होकर रह गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रकृतिसत्ता ने हमारे शरीर में आत्मारूपी अंश को स्थापित की है, साधना क्रमों के बल पर सतोगुणी कोशिकाओं को जाग्रत् करने की ज़रूरत है। इस अन्तर्निहित शक्ति के बल पर आप अधकचरे आधुनिकता से उभरकर, आधुनिक विज्ञान के ऐसे अविष्कारों को जो विकास कम और विनाश परक अधिक हैं, उससे कहीं अधिक विशिष्ट रचना करके समाज के लिये सही विकास का रास्ता प्रशस्त कर सकते हैं। गुलामी की मानसिकता से युक्त जीवन जीने वाले समाज के अधिसंख्यक वर्ग को आत्मसम्मानयुक्त, आत्मनिर्भरता का रास्ता प्रशस्त कर सकते हैं।’’</p>



<p class="wp-block-paragraph">सद्गुरुदेव भगवान् के चिन्तन अमूल्य हैं, जो इन्हें आत्मसात कर लेता है, उसका जीवन धन्य होजाता है। जीवन के विविध रंग-रूप हैं और यदि गहराई से देखा जाये, तो इसमें अद्भुत आनंद छिपा हुआ है। जरूरत है, तो केवल भौतिक जगत् की भूल-भुलैयों से निकलकर कुछ समय अध्यात्मिक जगत् में प्रवेश करने की। फिर देखिये कि किस तरह काम, क्रोध, लोभ, मोह, नियंत्रित होकर आन्तरिक आनन्दानुभूति की प्राप्ति होती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रस्तुति- अलोपी शुक्ला</p>



<p class="wp-block-paragraph">कार्यकारी सम्पादक: संकल्प शक्ति</p>
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		<title>भक्ति है तो सबकुछ है, भक्ति नहीं तो कुछ भी नहीं &#8211;ऋषिवर श्री शक्तिपुत्र जी महाराज</title>
		<link>https://sankalpshakti.in/if-there-is-devotion-then-everything-is-there-if-there-is-no-devotion-then-nothing/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Mar 2023 05:38:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ऋषिवाणी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दिनांक 29 मार्च 2023, आज चैत्र नवरात्र पर्व की अतिमहत्त्वपूर्ण तिथि अष्टमी है। वैसे तो नवरात्र के दिन ही नहीं, बल्कि सभी दिन एक समान होते हैं और हम जिस दिन से अच्छाईयों की ओर बढऩे का संकल्प ले लेते हैं, वहीं दिन जीवन में महत्त्वपूर्ण होजाता है। तो आइए, इस अतिमहत्त्वपूर्ण तिथि पर साधनापथ [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>दिनांक 29 मार्च 2023, </strong>आज चैत्र नवरात्र पर्व की अतिमहत्त्वपूर्ण तिथि अष्टमी है। वैसे तो नवरात्र के दिन ही नहीं, बल्कि सभी दिन एक समान होते हैं और हम जिस दिन से अच्छाईयों की ओर बढऩे का संकल्प ले लेते हैं, वहीं दिन जीवन में महत्त्वपूर्ण होजाता है। तो आइए, इस अतिमहत्त्वपूर्ण तिथि पर साधनापथ पर बढऩे के लिए संकल्प लें। जब आप साधनापथ को अंगीकार करने हेतु कृतसंकल्पित हो जायेंगे, तो यह कलिकाल भी आपको सतयुग के सदृश्य प्रतीत होने लगेगा। </p>



<p class="wp-block-paragraph">साधनापथ पर आगे बढऩे के लिए सबसे पहले आपको शांति की अतल गहराईयों में डूबना पड़ेगा। शांति की अतल गहराईयों में पहुंचने का सहज-सरल मंत्र बताते हुये ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज शक्तिपुत्र जी महाराज कहते हैं कि &#8221;ध्यानावस्थित मुद्रा में &#8216;माँ’ का स्मरण करते ही मन में सन्तुलन सहज रूप में स्थापित होजाता है। यदि अपने जीवन को सन्तुलित करना है, तो साधना के पथ पर चलना ही पड़ेगा। यदि आप सुख-शान्ति पाना चाहते हैं, तो एकमात्र मार्ग है माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की भक्ति।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भक्ति कैसी हो? भक्ति का स्वरूप क्या होना चाहिये? भक्ति दो प्रकार से की जाती है- सकाम भक्ति और निष्काम भक्ति। सकाम भक्ति से कुछ समय के लिये राहत मिल सकती है, लेकिन निष्काम भक्ति दीर्घकालिक ही नहीं, बल्कि इसकी लौ जन्म-जन्मांतर तक प्रज्ज्वलित होती रहती है। नवरात्र पर्व के ये दिन जीवन की दिशा को बदलने के दिन हैं, साधनापथ को अंगीकार करने के दिन हैं। </p>



<p class="wp-block-paragraph">जब तक भक्ति की गहराई को बढ़ाओगे नहीं, तब तक जीवन के क्रियाकलापों में उथलापन बना रहेगा। केवल पूजा-पाठ, कीर्तन-भजन कर लेना भक्ति नहीं है। भक्ति है जीवन में ऐसा परिवर्तन जो कि निश्छल हो। आज एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है, जिसकी भक्ति भावना निष्काम हो। यदि निष्काम भाव से भक्ति करोगे, तो जीवन में आने वाली कठिनाईयां स्वमेव दूर होती चली जायेंगी। यदि जीवन में भक्ति है, तो सबकुछ है और यदि भक्ति नहीं है, तो कुछ भी नहीं है।</p>



<p class="has-text-align-right wp-block-paragraph"><strong>प्रस्तुति:- अलोपी शुक्ला (संकल्प शक्ति)।</strong><strong></strong></p>
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