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	<title>संकल्प शक्ति &#8211; संकल्प शक्ति</title>
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	<description>राष्ट्रीय साप्ताहिक समाचार पत्र</description>
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	<title>संकल्प शक्ति &#8211; संकल्प शक्ति</title>
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		<title>आयरन की कमी को दूर करने के लिए अपनाएं आयुर्वेदिक उपाय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Apr 2024 03:40:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आयुर्वेद]]></category>
		<category><![CDATA[Anemia]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आहार में आयरन की कमी से दुनिया भर के लाखों लोग प्रभावित हैं। आयरन की कमी के कारण लोगों को थकान, कमजोरी, इम्यून सिस्टम कमजोर होने की समस्या हो सकती है। वैसे, तो बाज़ार में आप अन्य सप्लीमेंट्स की तरह आयरन की सप्लीमेंट्स भी मौजूद हैं। लेकिन, जब आप इस कमी को आहार से पूरा [&#8230;]</p>
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<p class="wp-block-paragraph">आहार में आयरन की कमी से दुनिया भर के लाखों लोग प्रभावित हैं। आयरन की कमी के कारण लोगों को थकान, कमजोरी, इम्यून सिस्टम कमजोर होने की समस्या हो सकती है। वैसे, तो बाज़ार में आप अन्य सप्लीमेंट्स की तरह आयरन की सप्लीमेंट्स भी मौजूद हैं। लेकिन, जब आप इस कमी को आहार से पूरा कर सकते हैं, तो ऐसे में सप्लीमेंट्स को चुनना गलत होगा। कई बार समस्याओं को नेचुरली उपायों से ठीक करना ज़्यादा फायदेमंद होता है। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आयरन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">आयुर्वेद के अनुसार आप आयरन से भरपूर संपूर्ण खाद्य पदार्थों के सेवन कर सकते हैं। अपने आहार में आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे पालक, केला, दाल, बीन्स और सूखे मेवे जैसे अंजीर और खुबानी शामिल कर सकते हैं। ये खाद्य पदार्थ न केवल आयरन प्रदान करते हैं, बल्कि उचित पाचन और आवश्यक पोषकतत्त्व प्रदान करते हैं। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पाचन अग्नि को बढ़ाने में सहायक</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">आयरन सहित पोषकतत्त्वों के अवशोषण के लिए आयुर्वेद में पाचन अग्नि को बढ़ाना महत्त्वपूर्ण है। इसके लिए आप अपने भोजन में अदरक, जीरा और धनिया हर्ब्स व मसालों को शामिल कर सकते हैं। ये सभी आपकी पाचन अग्नि को बढ़ाने में सहायक होते हैं। इससे भोजन से आयरन के अवशोषण को बढ़ावा मिलता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लोहे के बर्तनों में बनाएं खाना </strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">आयुर्वेद के अनुसार आयरन की कमी को दूर करने के लिए आप भोजन को लोहे के बर्तन में बनाएं। लोहे के बर्तनों में खाना पकाने से स्वाभाविक रूप से आपके भोजन में आयरन की मात्रा बढ़ सकती है। यह सरल अभ्यास समय के साथ आयरन के स्तर को धीरे-धीरे बढ़ा सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>त्रिफला का करें सेवन</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">त्रिफला, में तीन फल होते हैं। अमलाकी (आंवला), बिभीतकी और हरीतकी। त्रिफला शरीर की गंदगी को बाहर करता है और पाचन में सहायता करने में मदद करता है। त्रिफला के नियमित सेवन से पाचन में सुधार होता है।  </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आवला और शहद</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञों के अनुसार, आयरन की कमी को दूर करने के लिए आप एक चम्मच आवलां और एक चम्मच शहद को आपस में मिलाकर सेवन करें। इससे विटामिन सी और आयरन की कमी दूर होती है।&nbsp;&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मेथी के बीज का पानी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">मेथी के दानों को रात भर पानी में भिगो दें। इन्हें चावल के साथ पकाकर सेवन करें। यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ावा देगा। इसके अलावा, आप इस पानी का उपयोग अपना भोजन बनाने या छानकर पीने के लिए भी कर सकते हैं।</p>
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		<title>देवर्षि नारद को क्यों बनना पड़ा बंदर?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Feb 2024 03:57:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म अध्यात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नारद मुनि बड़े ही तपस्वी और ज्ञानी ऋषि थे, जिनके ज्ञान और तप की माता पार्वती भी प्रशंसक थीं। एक दिन माता पार्वती शिव जी से नारद मुनि के ज्ञान की प्रशंसा करने लगीं। शिव जी ने पार्वती जी को बताया कि नारद बड़े ही ज्ञानी हैं, लेकिन किसी भी चीज का अंहकार अच्छा नहीं [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">नारद मुनि बड़े ही तपस्वी और ज्ञानी ऋषि थे, जिनके ज्ञान और तप की माता पार्वती भी प्रशंसक थीं। एक दिन माता पार्वती शिव जी से नारद मुनि के ज्ञान की प्रशंसा करने लगीं। शिव जी ने पार्वती जी को बताया कि नारद बड़े ही ज्ञानी हैं, लेकिन किसी भी चीज का अंहकार अच्छा नहीं होता है। एक बार नारद को इसी अहंकार (घमंड) के कारण बंदर बनना पड़ा था। यह सुनकर माता पार्वती को बहुत आश्चर्य हुआ। उन्होंने शिव भगवान् से पूरा कारण जानना चाहा, तब श्री शिव ने बतलाया कि &#8216;इस संसार में कोई कितना ही बड़ा ज्ञानी हो, लेकिन श्री हरि जो चाहते हैं वो उसे बनना ही पड़ता है। नारद को एक बार अपने इसी तप और बुद्धि का अहंकार (घमंड) हो गया था। इसलिए नारद को सबक सिखाने के लिए श्री विष्णु को एक युक्ति सूझी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;अपने भक्त के अहंकार को श्री हरि सह नहीं पाते, इसलिए उन्होंने अपने मन में सोचा कि मैं ऐसा उपाय करूंगा कि नारद का घमंड भी दूर होजाए और मेरी लीला भी चलती रहे। श्री हरि ने अपनी माया से नारद जी जिस मार्ग से जा रहे थे, उस मार्ग पर एक बड़ा ही सुन्दर नगर बना दिया। उस नगर में शीलनिधि नाम का वैभवशाली राजा रहता था। उस राजा की विश्व मोहिनी नाम की बहुत ही सुंदर बेटी थी। विश्व मोहिनी स्वयंवर करना चाहती थी, इसलिए कई राजा उस नगर में आए हुए थे। नारद जी तो उस कन्या को देखते ही रह गए। अब नारद जी ने सोचा कि कुछ ऐसा उपाय करना चाहिए कि यह कन्या मुझसे ही विवाह करे। ऐसा सोचकर नारद जी ने श्री हरि को याद किया और भगवान् विष्णु उनके सामने प्रकट हो गए। नारद जी ने उन्हें सारी बात बताई और कहने लगे, हे नाथ आप मुझे अपना सुंदर रूप दे दो, ताकि मैं उस कन्या से विवाह कर सकूं। भगवान् हरि ने कहा, हे नारद! हम वही करेंगे जिसमें तुम्हारी भलाई हो। विष्णु जी ने अपनी माया से नारद जी को बंदर का रूप दे दिया। नारद जी को यह बात समझ में नहीं आई। वो समझे कि मैं बहुत सुंदर लग रहा हूं।&nbsp;&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">देवऋषि नारद तत्काल विश्व मोहिनी के स्वयंवर में पहुंच गए। स्वयं भगवान् विष्णु भी उस स्वयंवर में एक राजा का रूप धारण कर आ गए। विश्व मोहिनी ने कुरूप नारद की तरफ देखा भी नहीं और राजा रूपी विष्णु के गले में वरमाला डाल दी। मोह के कारण नारद मुनि की बुद्धि नष्ट हो गई थी। राजकुमारी द्वारा अन्य राजा को वरमाला डालते देखकर वे परेशान हो उठे और जल में झांककर अपना मुंह देखा तथा अपनी कुरूपता देखकर क्रोधित हो उठे। भगवान् विष्णु पर उन्हें बहुत गुस्सा आ रहा था, क्योंकि विष्णु के कारण ही उनका अपमान हुआ था। वे उसी समय विष्णु जी से मिलने के लिए चल पड़े। रास्ते में ही उनकी मुलाकात विष्णु जी से हो गई, जिनके साथ लक्ष्मी जी और विश्व मोहिनी भी थीं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्हें देखते ही क्रोध से भरे नारद जी ने कहा कि मैं आपको शाप देता हूँ कि आपको मनुष्य जन्म लेना पड़ेगा। आपने हमें स्त्री से दूर किया है, इसलिए आपको भी स्त्री से दूरी का दु:ख सहना पड़ेगा और आपने मुझको बंदर का रूप दिया, इसलिए आपको बंदरों से ही मदद लेना पड़ेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नारद के शाप को श्री विष्णु ने पूरी तरह स्वीकार कर लिया और उन पर से अपनी माया को हटा लिया। माया के हट जाने से अपने द्वारा दिए शाप को याद करके नारद जी को बहुत दु:ख हुआ, किन्तु दिया गया शाप वापस नहीं हो सकता था। इसीलिए श्री विष्णु को श्री राम के रूप में मनुष्य बनकर अवतरित होना पड़ा।</p>
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		<title>पक्षीप्रेमियों के लिए स्वर्ग है भोज वेटलैंड- Bhopal</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 Feb 2024 03:30:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[क्षेत्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भोपाल।&#160;हमारे भारत देश का हृदय कहा जाने वाला मध्यप्रदेश, पर्यटन के क्षेत्र में भी अपनी विशेष पहचान रखता है। अनेक धर्मों की सांस्कृतिक और अध्यात्मिक विरासत का समावेश आपको जहां एक अद्भुत राज्य का अहसास कराता है, वहीं असंख्य स्मारक, जटिल नक्काशीदार मंदिर, स्तूप, किले और महलों के लिए भी जाना जाता है। लेकिन, इन [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>भोपाल।</strong>&nbsp;हमारे भारत देश का हृदय कहा जाने वाला मध्यप्रदेश, पर्यटन के क्षेत्र में भी अपनी विशेष पहचान रखता है। अनेक धर्मों की सांस्कृतिक और अध्यात्मिक विरासत का समावेश आपको जहां एक अद्भुत राज्य का अहसास कराता है, वहीं असंख्य स्मारक, जटिल नक्काशीदार मंदिर, स्तूप, किले और महलों के लिए भी जाना जाता है। लेकिन, इन सबसे हटकर प्रदेश की राजधानी भोपाल को झीलों की नगरी के तौर पर जानना महत्त्वपूर्ण है, जहां आप प्रकृति की कुछ खूबसूरत कलाकृतियों के अद्भुत दृश्य देख सकते हैं। यहां आपको 5-10 नहीं, बल्कि 170-180 प्रजातियों के 50 हज़ार से अधिक रंग-बिरंगे प्रवासी और देशी पक्षी देखने को मिलते हैं और इन पंछियों के अलावा भी यहां देखने के लिए बहुत कुछ है। यही कारण है कि यहां हर वर्ष यूरोप, आयरलैंड, ब्रिटेन और चीन समेत अन्य देशों से प्रवासी पक्षी भोपाल आते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>दो तालाब मिलकर बने भोज वेटलैंड</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">शहर में बड़ा और छोटा तालाब मिलकर भोज वेटलैंड बन चुके है। यह विश्व के कुछ चुनिंदा रामसर स्थलों में से एक तो है ही, इसके साथ ही पर्यटन की दृष्टि से भी यह एक बेहतरीन स्थान है। गौरतलब है कि हमारे देश में जितने भी रामसर वेटलैंड्स हैं, उनमें से सबसे आसानी से पहुंच सकने वाली आद्रभूमियों में भोज वेटलैंड शामिल हैं। इसके साथ ही आपको यहां झील के चारों ओर खूबसूरत सड़क भी दिखेगी, जिससे आप झील के चारों ओर के सुन्दर दृश्यों का आनंद ले सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>देखने को मिलेंगे कई प्रजातियों के पक्षी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">लार्ज कामेरिंट, साइबेरियन स्टोन चैट, कामन शिफचैफ, गल, ब्लैक हेडेड गल, पर्पल हेरान, यूरेशियन कूट, स्पाट बिल्ड डक, लेसर व्हिसलिंग डक, यूरेशियन राइनेक, ग्रे लेग्ड गूज बर्ड्स, ब्लैक हेडेड आइबिस, ग्लासी आइबिस, रेड स्टार्ट, कामन स्निप जैसे पक्षियों के साथ ही रेड नेप्ड आइबिस, नार्दर्न शावेलर, कामन टील, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, कामन पोचार्ड, ब्लैक हेडेड आइबिस, ब्लू थ्रोट, लेसर व्हाइट थ्रोट, ग्रीन सैंडपाइपर, पेंटेड स्टार्क, ब्राउन हेडेड, रेड नेप्ड आइबिस, ब्लैक हेडेड बंटिंग जैसी अनेकों प्रजातियों के पक्षी देखने को मिलेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पक्षियों के अलावा भी बहुत कुछ</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">केवल पंछियों के लिए ही नहीं, बल्कि यह वेटलैंड अन्य कई पौधों जैसे मैक्रोफाइट्स, फाइटोप्लांकटन व अनेक जीवों ज़ोप्लांकटन, मछली की अनेक प्रजातियों, कई तरह के कीड़ों और सरीसृपों के लिए जानी जाती है।&nbsp;&nbsp;</p>
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		<title>हिन्दी साहित्य में छायावाद के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी &#8216;निराला&#8217;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Feb 2024 04:35:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समसामयिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सूर्यकान्त त्रिपाठी &#8216;निराला का जन्म बंगाल की महिषादल रियासत (जि़ला-मेदिनीपुर) में माघ शुक्ल 11, संवत् 1955, तदनुसार 21 फरवरी, सन् 1899 में हुआ था। बसंतपंचमी पर उनका जन्मदिन मनाने की परंपरा 1930 में प्रारंभ हुई। उनके पिता पंडित रामसहाय तिवारी उन्नाव (बैसवाड़ा) के रहने वाले थे और महिषादल में सिपाही की नौकरी करते थे। वे [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">सूर्यकान्त त्रिपाठी &#8216;निराला का जन्म बंगाल की महिषादल रियासत (जि़ला-मेदिनीपुर) में माघ शुक्ल 11, संवत् 1955, तदनुसार 21 फरवरी, सन् 1899 में हुआ था। बसंतपंचमी पर उनका जन्मदिन मनाने की परंपरा 1930 में प्रारंभ हुई। उनके पिता पंडित रामसहाय तिवारी उन्नाव (बैसवाड़ा) के रहने वाले थे और महिषादल में सिपाही की नौकरी करते थे। वे मूल रूप से उत्तरप्रदेश के उन्नाव जिले के गढ़ाकोला नामक गाँव के निवासी थे। 15 अक्टूबर 1961 को उन्होंने अपनी इहलीला समाप्त की।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong><br>कार्यक्षेत्र</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">सूर्यकांत त्रिपाठी &#8216;निराला&#8217; की पहली नियुक्ति महिषादल राज्य में ही हुई। उन्होंने 1918 से 1922 तक यह नौकरी की। उसके बाद संपादन, स्वतंत्र लेखन और अनुवाद कार्य की ओर प्रवृत्त हुए। 1922 से 1923 के दौरान कोलकाता से प्रकाशित &#8216;समन्वय&#8217; का संपादन किया और 1923 के अगस्त से मतवाला के संपादक मंडल में कार्य किया। इसके बाद लखनऊ में गंगा पुस्तक माला कार्यालय में उनकी नियुक्ति हुई, जहाँ वे संस्था की मासिक पत्रिका सुधा से 1935 के मध्य तक संबद्ध रहे। 1935 से 1940 तक का कुछ समय उन्होंने लखनऊ में भी बिताया। इसके बाद 1942 से मृत्यु पर्यन्त इलाहाबाद में रहकर स्वतंत्र लेखन और अनुवाद कार्य किया। उनकी पहली कविता &#8216;जन्मभूमि&#8217; प्रभा नामक मासिक पत्र में जून 1920 में, पहला कविता संग्रह 1923 में अनामिका नाम से, तथा पहला निबंध &#8216;बंग भाषा का उच्चारण&#8217;अक्टूबर 1920 में मासिक पत्रिका सरस्वती में प्रकाशित हुआ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अपने समकालीन अन्य कवियों से अलग उन्होंने कविता में कल्पना का सहारा बहुत कम लिया है और यथार्थ को प्रमुखता से चित्रित किया है। वे हिन्दी में मुक्तछन्द के प्रवर्तक भी माने जाते हैं। 1930 में प्रकाशित अपने काव्य संग्रह परिमल की भूमिका में उन्होंने लिखा है-</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8221;मनुष्यों की मुक्ति की तरह कविता की भी मुक्ति होती है। मनुष्यों की मुक्ति कर्म के बंधन से छुटकारा पाना है और कविता की मुक्ति छन्दों के शासन से अलग हो जाना है। जिस तरह मुक्त मनुष्य कभी किसी तरह दूसरों के प्रतिकूल आचरण नहीं करता, उसके तमाम कार्य औरों को प्रसन्न करने के लिए होते हैं फिर भी स्वतंत्र। इसी तरह कविता का भी हाल है।&nbsp;</p>
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		<title>बसंतपंचमी के दिन की जाती है विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Feb 2024 03:30:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[समसामयिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>बसंतपंचमी एक हिन्दू त्यौहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करते हैं। शास्त्रों में बसंतपंचमी को ऋषिपंचमी भी उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है। बसंत लोगों का सबसे मनचाहा मौसम है। इस [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">बसंतपंचमी एक हिन्दू त्यौहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करते हैं। शास्त्रों में बसंतपंचमी को ऋषिपंचमी भी उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बसंत लोगों का सबसे मनचाहा मौसम है। इस मौसम में फूलों पर बहार आ जाती है, खेतों में सरसों के फूल स्वर्णिम आभा बिखेरने लगते हैं, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगती हैंं, आमों के पेड़ों पर मांजर (बौर) आ जाता है और हर तरफ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं हैं।&nbsp;&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">बसंतऋतु आते ही प्रकृति का कण-कण खिल उठता है। मानव तो क्या पशु-पक्षी तक उल्लास से भर जाते हैं। हर दिन नयी उमंग से सूर्योदय होता है और नयी चेतना प्रदान करके अगले दिन फिर आने का आश्वासन देकर चला जाता है। वैसे तो माघ का यह पूरा मास ही उत्साह देने वाला है, पर बसंतपंचमी (माघ शुक्ल) का पर्व भारतीय जनजीवन को अनेक तरह से प्रभावित करता है। प्राचीनकाल से इसे ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है। जो शिक्षाविद भारत और भारतीयता से प्रेम करते हैं, वे इस दिन माँ सरस्वती, माँ शारदे की पूजा करके उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते हैं। इस वर्ष यह पर्व दिनांक 14 फरवरी को है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बसन्तपंचमी की कथा</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">उपनिषदों की कथा के अनुसार, सृष्टि के प्रारंभिककाल में भगवान् शिव की आज्ञा से भगवान् ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की, लेकिन अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे, उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है, जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है। तब ब्रह्मा जी ने इस समस्या के निवारण के लिए अपने कमण्डल से जल अपने हथेली में लेकर संकल्पस्वरूप उस जल को छिड़ककर भगवान् श्री विष्णु की स्तुति करनी आरम्भ की। ब्रम्हा जी की स्तुति को सुनकर भगवान् विष्णु तत्काल ही उनके सम्मुख प्रकट हो गए और उनकी समस्या जानकर उन्होंने आदिशक्ति माता जगदम्बे का आव्हान किया। विष्णु जी के द्वारा आव्हान होने के कारण माता जगदम्बे वहां तुरंत ही प्रकट हो गयीं, तब ब्रम्हा एवं विष्णु जी ने उन्हें इस संकट को दूर करने का निवेदन किया।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">ब्रम्हा जी तथा विष्णु जी की बातों को सुनने के बाद उसी क्षण आदिशक्ति के शरीर से श्वेत रंग का एक भारी तेज उत्पन्न हुआ, जो एक दिव्य नारी के रूप में बदल गया। यह स्वरूप एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था, जिनके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था और अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। आदिशक्ति के शरीर से उत्पन्न तेज से प्रकट होते ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, जिससे संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई, जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया, पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब सभी देवताओं ने शब्द और रस का संचार कर देने वाली उन देवी को वाणी की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती कहा।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">फिर आदिशक्ति जगदम्बे ने ब्रम्हा जी से कहा कि मेरे तेज से उत्पन्न हुई ये देवी सरस्वती आपकी पत्नी बनेंगी, जैसे लक्ष्मी श्री विष्णु की शक्ति हैं, पार्वती शिव की शक्ति हैं, उसी प्रकार ये सरस्वती देवी ही आपकी शक्ति होंगी। ऐसा कहकर वे अंतर्धान हो गयीं। इसके बाद सभी देवता सृष्टि के संचालन में संलग्न हो गए।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">सरस्वती को वागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं। बसन्तपंचमी के दिन को इनके प्रकटोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है-&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8216;प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">अर्थात् ये परम चेतना हैं। सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार भगवती सरस्वती ही हैं। इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है।&nbsp;&nbsp;</p>
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		<title>औषधीय गुणों से भरपूर है केसर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 13 Feb 2024 04:50:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आयुर्वेद]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>केसर क्रोकस फूल से प्राप्त एक मसाला है, जो औषधीय गुणों से&#160; भरपूर है। केसर को इस समय दुनिया का सबसे महंगा मसाला माना जाता है। इसमें मौज़ूद कैरोटीनॉयड क्रोसिन और क्रोसेटिन इसका रंग लाल और सुनहरा करते हैं। केसर में पाए जाने वाले पदार्थ हैल्थ के लिए काफी उपयोगी बनाते हैं। अध्ययनों से पता [&#8230;]</p>
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<p class="wp-block-paragraph">केसर क्रोकस फूल से प्राप्त एक मसाला है, जो औषधीय गुणों से&nbsp; भरपूर है। केसर को इस समय दुनिया का सबसे महंगा मसाला माना जाता है। इसमें मौज़ूद कैरोटीनॉयड क्रोसिन और क्रोसेटिन इसका रंग लाल और सुनहरा करते हैं। केसर में पाए जाने वाले पदार्थ हैल्थ के लिए काफी उपयोगी बनाते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि केसर का सेवन स्वास्थ्य को कई तरह से लाभ पहुंचा सकता है और लम्बे समय तक बढ़ती उम्र की बीमारियों से बचाव कर सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट </strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">केसर एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट पदार्थों से भरपूर होता है। क्रोसिन, क्रोसेटिन और पिक्रोक्रोसिन जैसे कैरोटीनॉयड और सफ्रानल केसर में पाए जाने वाले मुख्य बायोएक्टिव यौगिक हैं। अध्ययन में सामने आया है कि नियमित रूप से केसर का सेवन करने से शरीर में सूजन कम होती है और तनाव कम होता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>डायबिटीज में फायदेमंद </strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">टाइप 2 डायबिटीज वाले 80 लोगों पर हुए अध्ययन के मुताबिक जिन प्रतिभागियों ने 12 सप्ताह तक प्रतिदिन 10 मिलीग्राम केसर का सेवन किया था, उनके रक्त में ऑक्सीडेटिव तनाव के एक मार्कर, मैलोनडायलडिहाइड (एमडीए) के स्तर में नियंत्रण समूह की तुलना में कमी देखी गई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>केसर में होते हैं नींद लाने वाले गुण</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">शोध से पता चलता है कि केसर में पाए जाने वाले सक्रिय पदार्थों में नींद लाने वाले गुण होते हैं और नींद की गुणवत्ता और अवधि पर लाभकारी प्रभाव पड़ सकता है। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि केसर नींद को नियंत्रित करने वाले हार्मोन मेलाटोनिन के स्तर को बढ़ाकर और नींद की गुणवत्ता में सुधार करता है। इससे मस्तिष्क में कुछ रिसेप्टर्स पर कार्य करके नींद में सुधार करने में मदद कर सकता है।बना रहता है </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मानसिक स्वास्थ्य</strong> </p>



<p class="wp-block-paragraph">केसर ने चिंता और अवसाद सहित मानसिक स्वास्थ्य विकारों के लिए एक प्राकृतिक उपचार के रूप में वादा दिखाया है। 23 अध्ययनों की समीक्षा में पाया गया कि केसर से अवसाद और चिंता के लक्षणों पर महत्त्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। केसर में मौजूद क्रोसिन और सफ्रानल, डोपामाइन, नॉरपेनेफ्रिन और सेरोटोनिन जैसे मूड-बूस्टिंग न्यूरोट्रांसमीटर चिंता और अवसाद के लक्षणों में सुधार करते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आंखों के लिए लाभकारी </strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">अध्ययनों से पता चलता है कि केसर उन लोगों को फायदा पहुंचा सकता है, जो आंखों को प्रभावित करते हैं, जैसे उम्र से संबंधित मैक्यूलर डीजेनरेशन (एएमडी) एक आंख की बीमारी जो वर्तमान में आंखों की रोशनी को प्रभावित करती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>खानें में रखे सावधानी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">अध्ययनों से पता चलता है कि 26 सप्ताह तक प्रतिदिन 10 मिलीग्राम तक केसर अर्क का उपयोग सुरक्षित है, लेकिन इससे अधिक समय तक केसर की खुराक लेने या प्रति दिन पाँच ग्राम से अधिक केसर का सेवन करने से दस्त और उल्टी जैसे गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। अधिक केसर का सेवन घातक हो सकता है। हालांकि केसर बहुत महंगा होता है, इसलिए ज़्यादातर लोग इसका इस्तेमाल कम मात्रा में करते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>केसर और दूध </strong> </p>



<p class="wp-block-paragraph"> केसर का दूध और मिठाई सबसे ज़्यादा प्रचलित है। वहीं पुडिंग और आइसक्रीम में केसर का उपयोग किया जा सकता है। केसर को आप खाद्य पदार्थों में मिलाकर खा सकते है। हालांकि आपको नकली और असली केसर में अंतर करना ज़रूर आना चाहिए। बाज़ार में इन दिनों नकली केसर भी आ रही है।</p>
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		<title>गुप्त नवरात्रारंभ पर विशेष</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 13 Feb 2024 04:44:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म अध्यात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल चार बार नवरात्र मनाए जाते हैं, जिसमें चैत्र और आश्विन माह (शारदीय नवरात्र) में प्रकट नवरात्र मनाई जाती है। वहीं माघ और आषाढ़ माह में गुप्त नवरात्र मनाई जाती हैं। मान्यता है कि गुप्त नवरात्र में माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना करने से साधक को सभी कष्टों से मुक्ति मिल [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल चार बार नवरात्र मनाए जाते हैं, जिसमें चैत्र और आश्विन माह (शारदीय नवरात्र) में प्रकट नवरात्र मनाई जाती है। वहीं माघ और आषाढ़ माह में गुप्त नवरात्र मनाई जाती हैं। मान्यता है कि गुप्त नवरात्र में माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना करने से साधक को सभी कष्टों से मुक्ति मिल सकती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> माघ मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्र की शुरुआत मानी जाती है। ऐसे में पंचांग के अनुसार, साल 2024 में माघ गुप्त नवरात्र की शुरुआत 10 फरवरी, दिन शनिवार के दिन से हो रही है। वहीं, 18 फरवरी, रविवार के दिन इसका समापन होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;सनातन धर्म में नवरात्र के समय में माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की आराधना करके उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है, जबकि गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की पूजा-अर्चना गुप्त तरीके से की जाती है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये हैं दस महाविद्याएं&nbsp;&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">काली, तारा, छिन्नमस्ता, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला। गुप्त नवरात्र के दौरान इन दस महाविद्याओं की पूजा का विधान है। ये 10 महाविद्याएं माँ दुर्गा के ही रूप हैं। माना जाता है कि इनकी आराधना करने से साधक की सिद्धि पूरी होती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>दो देवियों की पूजा का अवसर और</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">इस गुप्त नवरात्र में केवल दस देवियों के लिए नही, बल्कि माता सरस्वती और माँ नर्मदा की आराधना के लिए भी दो विशेष दिन मिलेंगे, क्योंकि गुप्त नवरात्र के बीच ही यानी 14 फरवरी को बसंतपंचमी मनाई जाएगी, जिस दौरान माता सरस्वती की पूजा की जाती है। वहीं, 16 फरवरी को माँ नर्मदा जयंती मनाई जाएगी। ऐसे में भक्तों को माता सरस्वती और माँ नर्मदा की आराधना का भी अवसर प्राप्त होगा।</p>
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		<title>क्या सर्दियों में पीना चाहिए गन्ने का जूस?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 08 Feb 2024 05:00:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आयुर्वेद]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गन्ने का जूस सिर्फ स्वाद में ही अच्छा नहीं होता है, बल्कि सेहत के लिए भी ये अच्छा माना जाता है। वैसे तो गन्ने के जूस को लोग गर्मियों में पीना पसंद करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सर्दियों में भी गन्ने के जूस का सेवन किया जा सकता है? सर्दियों में गन्ने [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">गन्ने का जूस सिर्फ स्वाद में ही अच्छा नहीं होता है, बल्कि सेहत के लिए भी ये अच्छा माना जाता है। वैसे तो गन्ने के जूस को लोग गर्मियों में पीना पसंद करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सर्दियों में भी गन्ने के जूस का सेवन किया जा सकता है? सर्दियों में गन्ने का जूस सेहत के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। इसलिए अगर आप ये सोचते हैं कि गन्ने का रस केवल गर्मी में ही पिया जाता है, तो ये गलत है। सर्दियों में गन्ने के जूस का सेवन करने से बॉडी हाइड्रेट रहती है।  </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>शरीर को रखता है हाईड्रेट</strong> </p>



<p class="wp-block-paragraph">सर्दियों में गन्ने का जूस पीना काफी फायदेमंद हो सकता है। दरअसल, ठंड के मौसम में गन्ने का जूस शरीर को हाईड्रेट रखने का काम करता है। ठंड के मौसम में लोग कम मात्रा में पानी पीते हैं। ऐसे में शरीर में पानी की कमी होजाती है। इस स्थिति में आप गन्ने का जूस पीकर अपनी बॉडी को हाइड्रेट रख सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>इम्यूनिटी बनाएं मज़बूत</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"> गन्ने का जूस मैग्नीशियम, कैल्शियम और आयरन का एक अच्छा सोर्स माना जाता है। इसका जूस पीकर आप अपनी इम्यूनिटी सिस्टम को मज़बूत कर सकते हैं। इसमें ज़रूरी मिनरल्स भी होते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>हड्डियो को करे मज़बूत</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"> गन्ने का जूस इम्यूनिटी के साथ-साथ हड्डियों को भी मज़बूत कर सकता है। जिन लोगों की हड्डियां कमज़ोर होती हैं, उनके लिए गन्ने के जूस का सूवन करना फायदेमंद होता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तनाव पर नियंत्रण </strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">गन्ने का जूस पीने से आप अपने तनाव पर नियंत्रण कर सकते हैं। गन्ने का जूस पीने से स्लीप भी इंप्रूव होती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पाचनतंत्र रखे स्वस्थ </strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">गन्ने का जूस पाचनतंत्र के लिए भी अच्छा माना जाता है। इसमें मौज़ूद फाइबर की मात्रा कब्ज और अपच जैसी समस्याओं को कम करने के साथ पेट को स्वस्थ बनाए रखने में भी लाभदायक है। इसे पीने से पाचनतंत्र ठीक रहता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पीलिया को करे ठीक</strong> </p>



<p class="wp-block-paragraph">गन्ने का जूस पीलिया के मरीजों के लिए भी अच्छा माना जाता है। गन्ना पीलिया के लिए सबसे अच्छे उपचारों में से एक है। गन्ने का जूस पीकर पीलिया को ठीक किया जा सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में दिनांक 10-11 फरवरी को शक्ति चेतना जनजागरण शिविर का विशाल आयोजन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 08 Feb 2024 01:28:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ऋषिवाणी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>संकल्प शक्ति। समाज को नशे-मांसाहार व चरित्रहीनता से मुक्त कराने एवं मानवीय कर्तव्यों का बोध कराने के लिये ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के निर्देशन में भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के द्वारा संयुक्त रूप से शक्ति चेतना जनजागरण शिविरों, धार्मिक अनुष्ठानों व नशामुक्ति जनजागरण सद्भावना यात्रा के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">संकल्प शक्ति। समाज को नशे-मांसाहार व चरित्रहीनता से मुक्त कराने एवं मानवीय कर्तव्यों का बोध कराने के लिये ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के निर्देशन में भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के द्वारा संयुक्त रूप से शक्ति चेतना जनजागरण शिविरों, धार्मिक अनुष्ठानों व नशामुक्ति जनजागरण सद्भावना यात्रा के माध्यम से करोड़ों परिवारों में माता भगवती की भक्तिरूपी दीप प्रज्ज्वलित करके सुख, शांति व समृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया गया है और यह अभियान निरन्तर गतिशील है। इसी क्रम में दिनांक 10-11 फरवरी 2024 को साइन्स कॉलेज ग्राउण्ड, सरकण्डा, जि़ला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में शक्ति चेतना जनजागरण शिविर का विशाल आयोजन किया जा रहा है। इस शिविर में लाखों लोग शामिल होकर अपने जीवन को सदमार्ग पर बढ़ाने के लिए अद्वितीय प्रेरणा प्राप्त करेंगे।   </p>



<p class="wp-block-paragraph">वेद-पुराणों, रामायण और गीता में धर्म-अध्यात्म व कर्मपथ पर बढऩे के लिये तरह-तरह के दृष्टांत दिये गये हैं, लेकिन उन भावों को ग्रहण करने के लिये पर्याप्त समय, गहन अध्ययन, विकसित मस्तिष्क और पवित्र विचारों की आवश्यकता है। ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने अपने शिष्यों को धर्म-अध्यात्म के क्षेत्र में ही नहीं, वरन् जीवन के सर्वांगीण विकास के लिये समस्त वेद-शास्त्रों का सार अपने चिन्तनों में समाहित करके समाज के सामने एक सशक्त विचारधारा के रूप में प्रदान किया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> आप नित्यप्रति विचार करें कि मैं अपने विचारों को भटकने नहीं दूँगा और विचारों की उत्कृष्टता के लिए सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के अमोघ चिन्तन एवं उनकी जीवनी का अध्ययन करूँगा तथा स्वयं को उसी अनुरूप ढालने का प्रयास करूँगा। किसी के प्रति द्वेषभाव नहीं रखूँगा और अपना स्वभाव मधुर रखूँगा। कभी किसी की द्वेषपूर्ण आलोचना नहीं करूँगा और मेरे सामने जो भी समस्याएं आयेंगी, उन्हें धीरे-धीरे सुलझाने का प्रयास करूँगा तथा यह सोचकर मन को उद्विग्न नहीं होने दूँगा कि समस्याओं का निदान कैसे होगा? ये विचार ही आपकी समस्याओं के निदान और निर्भयता प्रदान करने वाले हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> प्रकृतिसत्ता माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी का अंश आत्मा के रूप में हमारे अंदर विद्यमान है और &#8216;माँ &#8216; ने उस अनमोल अंश को रखने के लिये शरीररूपी अनमोल मंदिर दिया है, जिसके अन्दर निखिल ब्रह्माण्ड समाहित है। प्रकृति ने हमारे लिये ज्ञान का भंडार खोल रखा है, जिसे हम अपनी सामथ्र्यानुसार प्राप्त कर सकते हैं। फिर भी हम व्यथित हैं, नाना प्रकार की समस्याओं से ग्रसित हैं। आखिर क्यों? इसलिए कि हम योग-ध्यान-साधना में प्रवृत्त ही नहीं हो पा रहे हैं और हमारे विचार व कर्म ही शुद्ध व सात्विक नहीं हैं। जबकि, प्रकृतिसत्ता हमसे चाहती है कि हमारे विचार शुद्ध एवं सात्विक हों और कर्म साधना से परिपूर्ण हो। </p>



<p class="wp-block-paragraph"> ध्यान रखें; जीवन में जो भी चल रहा है, वह हमारी नकारात्मक और सकारात्मक सोच का परिणाम है। सकारात्मक सोच वाले तो लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते जा रहे हैं, जबकि नकारात्मक सोच वाले बहुत पीछे हैं। सकारात्मक सोच जहाँ शान्ति प्रदान करती है, वहीं लक्ष्य की ओर कदम आगे बढ़ते चले जाते हैं। अपने अन्दर दृढ़ विश्वास जाग्रत् करो, स्थायित्व धारण करो कि हम नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् जीवन जिएंगे और जीवन के किसी भी मोड़ पर किसी के भी बहकावे में नहीं आएंगे। इससे आपकी व्यथा, आपका समस्याएं दूर होती चली जायेंगी और आप धर्म, राष्ट्र एवं मानवता के रक्षक बनेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ऋषिवर श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के हृदय की विशालता का आकलन करना सहज नहीं है। आपश्री अपने शिष्यों से कहते हैं कि &#8221;तुम चाहे जहाँ रहो, मैं सदैव तुम्हारे साथ हूँ। मैं तुम्हारा रक्षाकवच हूँ, मैं तुम्हारे लिये ही जीता हूँ और अपनी अनुभूतियों का फल तुम्हें देता हूँ। तुम मेरे चेतना के अंश हो और मेरे हृदय में रहते हो। मेरी दृष्टि सदैव तुम्हारे ऊपर रहती है कि तुम्हारा उत्थान हो रहा है या नही! मैं सबकुछ देखता हूँ।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> छत्तीसगढ़ के जि़ला-बिलासपुर में आयोजित द्विदिवसीय शक्ति चेतना जनजागरण शिविर में ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के चेतनात्मक चिन्तन, मार्गदर्शन, योग-ध्यान-साधना के क्रम, गुरुदीक्षा और दिव्य आरतियों का कार्यक्रम है। इसमें शामिल होकर आप अपने जीवन को अध्यात्मिक दिशा देने के साथ ही प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। </p>
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		<title>सद्गुरु की प्राप्ति होने पर ही जाग्रत् होती हैं अलौकिक क्षमताएं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संकल्प शक्ति]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 Feb 2024 04:30:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जनजागरण]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हमीरपुर। भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में पातालेश्वर महादेव मंदिर, हमीरपुर में प्रथम रविवार को मासिक महाआरतीक्रम सम्पन्न किया गया। शुभारम्भ में &#8216;माँ-गुरुवर के जयकारे ओम शर्मा जी और आयुषी पाठक जी ने लगवाए। साधनाक्रम एवं &#8216;माँ-गुरुवर की आरती सम्पन्न होने के बाद भारतीय शक्ति चेतना पार्टी, युवा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">हमीरपुर। भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में पातालेश्वर महादेव मंदिर, हमीरपुर में प्रथम रविवार को मासिक महाआरतीक्रम सम्पन्न किया गया। शुभारम्भ में &#8216;माँ-गुरुवर के जयकारे ओम शर्मा जी और आयुषी पाठक जी ने लगवाए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">साधनाक्रम एवं &#8216;माँ-गुरुवर की आरती सम्पन्न होने के बाद भारतीय शक्ति चेतना पार्टी, युवा मोर्चा की जि़ला उपाध्यक्ष प्रीति कुशवाहा जी ने कार्यक्रम में उपस्थित भक्तों को सम्बोधित करते हुए कहा कि &#8221;आप लोगो ने उस धरती पर जन्म लिया है, जिस धरती पर अनेक महापुरुषों और वीरांगनाओं ने जन्म लेकर अन्यायी-अधर्मियों को धूल चटाई है, वह शक्ति-सामथ्र्य आपके अंदर भी है और यदि आप लोग चाह लें, तो युग बदलते देर नही लगेगी। टीमप्रमुख लक्ष्मी कुशवाहा जी ने कहा कि &#8221;जीवन में सद्गुरु का होना बहुत ज़रूरी है। हमें धन-दौलत, मान- सम्मान कहीं भी प्राप्त हो सकता है, लेकिन सदगुरु की प्राप्ति होने पर हमारी अलौकिक क्षमताएं जाग्रत् होती हैं । सदगुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज कहते हैं कि करोड़ों किलोमीटर दूर रहने वाले लोग भी, जो मेरी विचारधारा पर चलते हैं, वे मेरी चेतनातरंगों को प्राप्त करके सुख-शान्ति के अधिकारी बनेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के जि़लाध्यक्ष अनंराम शिवहरे जी ने भी उपस्थित भक्तों के समक्ष अपने विचार रखे। अंत में शक्तिजल और प्रसाद का वितरण किया गया। कार्यक्रम का संचालन पार्टी के जि़ला सचिव जुगुल किशोर पाठक जी ने किया</p>
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